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Friday, August 17, 2018

August 17, 2018

लोदी वंश


       लोदी वंश (1451- 1526 ई0)


   राजधानी:      दिल्ली,आगरा 
   भाषा:           फारसी 
   धर्म:             सुन्नी इस्लाम 
   शासन:         सल्तनत 

   पहला सुल्तान:      बहलोल लोदी 
   अंतिम सुल्तान:      इब्राहिम लोदी


                 लोदी वंश की स्थापना बहलोल लोदी ने 1451 ई0 में की थी। लोदीयों को अफगान नस्ल की एक जाती मानी हैं। अनेकों समस्याओं केे बावजूद बहलोल लोदी अपने साम्राज्य का विस्तार करने मेें सफल रहा। जौनपुर का शर्की सुल्तान उसका सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी था। लोदी वंश का वह योग्य शासक माना जाता हैं। सिकंदर लोदी ने आगरा को अपनी राजधानी बनाई थी। बिहार को अपने राज्य मेें मिलाना सिकंदर लोदी की बड़ी सफलता थी। इब्राहिम लोदी लोदी वंश अथवा दिल्ली सल्तनत का अंतिम सुल्तान था।


  ➢  लोदी वंश के बारे महत्वपूर्ण बिंदू:

  • लोदी वंश का संस्थापक बहलोल लोदी था।
  • 19 अप्रैल, 1451 ई0 को 'बहलोल शाहगाजी' की उपाधी से दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
  • दिल्ली पर प्रथम अफगान राज्य की स्थापना का श्रेय बहलोल लोदी को दिया जाता हैं।
  • बहलोल लोदी ने बहलोल सिक्के की शुरुआत की थी।
  • वह अपने सरदारों को मकसदे-ए-अली कहकर पुकारता था।
  • वह अपने सरदारों के खड़े रहने पर स्वयं भी खड़ा रहता था।
  • बहलोल लोदी का पुत्र निजाम खाँ 17 जुलाई, 1489 ई0 को 'सुल्तान सिकंदर शाह' की उपाधि से दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
  • सिकंदर लोदी ने ही आगरा शहर की स्थापना की।
  • इसने आगरा को अपनी राजधानी बनाया।
  • भूमि मापने के लिए प्रामाणिक पैमाना गजे सिकंदरी की शुरुआत सिकंदर लोदी ने की थी।
  • 'गुलरुखी' शीर्षक से फारसी कविताएँ लिखने वाला सुल्तान सिकंदर लोदी था।
  • इसके आदेश पर संस्कृत के एक आयुर्वेद ग्रंथ का फारसी में फरहंगे सिकंदरी के नाम से अनुवाद हुआ।
  • इसने नगरकोट के ज्वालामुखी मंदिर की मुर्ति को तोड़कर उसके टुकड़ों को कसाइयों को मांस तौलने के लिए दे दिया था।
  • इसने मुसलमानों को ताजिया निकालने एवं मुस्लिम स्त्रियों को पीरों और संतों के मजार पर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
  • मोठ की मस्जिद का निर्माण सिकंदर लोदी के वजीर के द्वारा करवाया गया था।
  • गले की बीमारी के कारण सिकंदर लोदी की 21 नवम्बर, 1517 ई0 को हो गयी। इसी दिन इसका पुत्र 'इब्राहिम शाह' की उपाधि से आगरा के सिंहासन पर बैठा।
  • 21 अप्रैल, 1526 ई0 को पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी बाबर से हार गया। वह इस युद्ध में मारा गया।
  • बाबर को भारत पर आक्रमण के लिए निमंत्रण पंजाब के शासक दौलत खाँ लोदी और इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खाँ ने दिया था।

नोट: सैय्यद वंश ने 1414-1451 ई0 तक दिल्ली              पर शासन किया था।

➢  सैय्यद वंश के बारे कुछ जानकारियां।
  • सैय्यद वंश का संस्थापक ख्रिज खाँ था। ख्रिज खाँ तैमूरलंग का सेनापति था। 
  • भारत पर आक्रमण कर लौटते समय तैमूरलंग ने ख्रिज खाँ को मुल्तान और लाहौर का शासक नियुक्त किया था।
  • ख्रिज खाँ तैमूरलंग के पुत्र शाहरुख को नियमित रूप से कर भेजा  था।
  • इसकी म्रत्यु 20 मई, 1421 ई0 में हो गयी।
  • ख्रिज खाँ के बाद उसका पुत्र मुबारक शाह शासक बना। इसने यमुना के किनारे मुबारकाबाद की स्थापना की थी।
  • सैय्यद वंश का अंतिम सुल्तान अलाउद्दीन आलम शाह था।
  • सैय्यद वंश का शासन करीब 37 वर्षों तक रहा।

➢ चुकिं सैय्यद वंश और लोदी वंश भी दिल्ली             सल्तनत का भाग है इसलिए दिल्ली सल्तनत           के बारें में कुुुुछ महत्वपूर्ण बातें जान ले।

        दिल्ली सल्तनत (1206 -1526 ई0) 


        राजधानी:       लाहौर (1206 -1210 ई0)
                              बदांयू  (1210 -1214 ई0)
                              दिल्ली (1214 -1327 ई0)
                              दौलताबाद (1327 -1334 ई0)
                              दिल्ली   (1334 -1506 ई0)
                             आगरा  (1506 -1526 ई0)

        भाषा:               फारसी
                                हिंदवी 
        धर्म:                  सुन्नी इस्लाम 
        शासन:              सल्तनत 

    प्रथम सुल्तान:    कुतुबुद्दीन ऐबक
    अंतिम सुल्तान:   इब्राहिम लोदी

     स्थापना:    जून, 1206 ई0
     अंत:          पानीपत का प्रथम युद्ध  (अप्रैल,                             1526 ई0)

     ➢  दिल्ली सल्तनत के बारे महत्वपूर्ण बिंदु


    • 1206 ई0 से 1526 ई0 तक भारत में दिल्ली सल्तनत के पाँच राजवंशों ने शासन किया। इन पाँच राजवंशों के शासनकाल को सल्तनतकाल कहा जाता हैं। यह पाँच राजवंशों निम्न हैं।
    1. गुलाम वंश  (1206 -1290 ई0) 
    2. खिलजी वंश  (1290 -1320 ई0)
    3. तुगलक वंश  (1320 -1398 ई0)
    4. सैयद वंश  (1414 -1451 ई0)
    5. लोदी वंश  (1451 -1526 ई0)

    • तुर्क आक्रमणकारियों द्वारा शासन किए हुए राज्य को ही दिल्ली सल्तनत कहा जाता हैं। 
    • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में सुल्तान राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था।
    • सुल्तान स्वयं को अल्लाह का प्रतिनिधि मानता था। कुरान के नियमों के अनुसार शासन चलाता था।
    • सुल्तान को शासन-कार्य में सहायता देने के लिए मंत्रिपरिषद होती थी।
    • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में चार प्रकार के कर किए जाते थे, खम्स, खराज, जकात और जजिया (सिर्फ हिन्दुओं से)
    • साम्राज्य प्रांतो में बंटे होते थे। प्रत्येक प्रांतो का शासक सूबेदार होता था।
    • प्रधानमंत्री को वजीर कहा जाता था।

    Thursday, August 16, 2018

    August 16, 2018

    तुगलक वंश

                         

            तुगलक वंश (1320- 1398 ई0)


        राजधानी:                   दिल्ली 
        भाषा:                        फारसी 
        धर्म:                           सुन्नी इस्लाम 
        शासन:                       सल्तनत 


        प्रथम सुल्तान:         गयासुद्दीन तुगलक
       अंतिम सुल्तान:        नासिरुद्दीन महमूद


               तुगलक वंश दिल्ली सल्तनत का एक राजवंश था। गयासुद्दीन तुगलक ने इस वंश की स्थापना की थी। तुगलक वंश को तुर्क नस्ल की एक जाति मानी जाती हैं।
    गयासुद्दीन तुगलक, मुहम्मद बिन तुगलक और फिरोज तुगलक इस वंश के योग्य शासक थे। मुहम्मद बिन तुगलक केे शासनकाल में दक्षिण भारत में विजयनगर और बहमनी नाम के दो स्वतंत्र राज्य की स्थापना हुई थी। अफ्रीक यात्री इब्नबतूता इस शासनकाल में भारत आया था। तैमूरलंग का आक्रमण और उत्तराधिकार का अभाव इस वंश के समाप्त होने केे कारण माने जाते हैैं। इस वंश ने 1320- 1398 ई0 तक शासन किया।


     ➢   तुगलक युग के बारे महत्त्वपूर्ण बातें:
    • गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलक वंश की स्थापना की थी।
    • गाजी मलिक 5 सितम्बर, 1320 ई0 को खिलजी वंश के खुशरों खाँ को पराजित कर गयासुद्दीन तुगलक के नाम से 8 सितम्बर, 1320 ई0 को दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
    • गयासुद्दीन तुगलक ने करीब 29 बार मंगोल आक्रमण को विफल किया था।
    • गयासुद्दीन तुगलक ने दिल्ली के समीप स्थित पहाड़ियों पर तुगलकाबाद नाम का एक नया नगर स्थापित किया। रोमन शैली में निर्मित इस नगर में एक दुर्ग का निर्माण भी हुआ था। इस दुर्ग को छप्पनकोट के नाम से भी जाना जाता हैं।
    • इसने सिंचाई के लिए कुएँ एवं नहरों का निर्माण करवाया। सम्भवतः नहरों का निर्माण करने वाला गयासुद्दीन तुगलक प्रथम शासक था।
    • गयासुद्दीन तुगलक की म्रत्यु 1325 ई0 में बंगाल के अभियान से लौटते समय जूना खाँ द्वारा निर्मित लकड़ी के महल में दबकर हो गयी थी।


    • गयासुद्दीन तुगलक के बाद जूना खाँ मुहम्मद बिन तुगलक के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा।
    • मध्यकाल के सभी सुल्तानों में मुहम्मद बिन तुगलक सर्वाधिक शिक्षित, विद्वान एवं योग्य व्यक्ति था।
    • मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा किए गए चार योजनाएँ निम्न थी-
    1. राजधानी- परिवर्तन।
    2. सांकेतिक मुद्रा की शुरुआत।
    3. दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि।
    4. खुरासन एवं कराचिल का अभियान।
    • मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि के विकास के लिए 'अमिर-ए-कोही' नामक एक नवीन विभाग की स्थापना की।
    • मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरी लाया और इसका नाम दौलताबाद रखा।
    • अफ्रीकी यात्री इब्नबतूता लगभग 1333 ई0 में भारत आया था। सुल्तान ने इसे काजी नियुक्त करवाया और 1342 ई0 मेें इसे अपने राजदूत के रूप में चीन भेजा।
    • इब्नबतूता की पुस्तक रेहला में मुहम्मद बिन तुगलक के समय की घटनाओं का वर्णन है।
    • मुहम्मद बिन तुगलक शेख अलाउद्दीन का शिष्य था। वह सल्तनत का पहला शासक था, जो अजमेर में शेख मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और बहराइच में सालार मसूद गाजी के मकबरे में गया था।
    • मुहम्मद बिन तुगलक ने बदायूँ में मीरन मुलहीम, दिल्ली में शेख निजामुद्दीन औलिया, मुल्तान में शेख रुकनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और अजुधन में शेख मुल्तान आदि संतों की कब्र पर मकबरे बनवाए।
    • मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दक्षिण में हरिहर एवं बुक्का नामक दो भाइयों ने 1336 ई0 में स्वतंत्र राज्य विजयनगर की स्थापना की।
    • महाराष्ट्र में अलाउद्दीन बहमन शाह ने 1347 ई0 में स्वतंत्र बहमनी राज्य की स्थापना की।
    • मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु 20 मार्च, 1351 ई0 को सिंध जाते समय थट्ठा के निकट गोडाल में हो गयी थी।

    • मुहम्मद बिन तुगलक के बाद फिरोज तुगलक सुल्तान बना। इसका राज्याभिषेक थट्ठा के नजदीक 20 मार्च, 1351 ई0 को हुआ। पुनः फिरोज तुगलक का राज्याभिषेक दिल्ली में अगस्त 1351 ई0 को हुआ। खलीफा ने इसे कासिम अमिर उल मोममीन की उपाधि दी।
    •  फिरोज तुगलक ने 5 बड़ी नहरों कि निर्माण करवाया था।
    • फिरोज तुगलक ने 300 नये नगरों की स्थापना की। इनमें हिसार, फिरोजपुर, फतेहाबाद, जौनपुर, फिरोजाबाद (दिल्ली) आदि प्रमुख हैं।
    • इसके शासनकाल में ख्रिजाबाद (टोपरा गाँव) और मेरठ से अशोक के दो स्तम्भों को लाकर दिल्ली में स्थापित किया गया।
    • सुल्तान फिरोज तुगलक ने अनाथ मुस्लिम महिलाओं, विधवाओं, और लड़कियों की सहायता के लिए एक नए विभाग दीवान-ए-खैरात की स्थापना की।
    • सल्तनतकालीन सुल्तानों के शासनकाल में सबसे अधिक दासों की संख्या (करीब - 1,80,000) फिरोज तुगलक के समय थी।
    • फिरोज तुगलक ने सैन्य पदों को वंशानुगत बना दिया।
    • फिरोज तुगलक ने अपनी आत्मकथा फतूहात-ए-फिरोजशाही की रचना की।
    • इसने ज्वालामुखी मंदिर के पुस्तकालय से लुटे गए 1300 ग्रंथों में से कुछ को फारसी में विद्वान अपाउद्दीन द्वारा दलायते-फिरोजशाही नाम से अनुवाद करवाया।
    • फिरोज तुगलक ने दिल्ली में कोटला फिरोजशाह दुर्ग का निर्माण करवाया।
    • फिरोज काल में निर्मित खान-ए-जहाँ तेलंगानी के मकबरे की तुलना जेरुसलम में निर्मित उमर के मस्जिद से की जाती हैं।
    • फिरोज तुगलक की मृत्यु सितम्बर, 1388 ई0 में हो गयी।
    • तुगलक वंश का अंतिम शासक नासिरुद्दीन महमूद तुगलक था। इसका शासन दिल्ली से पालम तक ही रह गया था।
    • तैमूरलंग ने सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद के समय में दिल्ली पर 1398 ई0 में आक्रमण किया था।


    ➢ चुकिं तुगलक वंश दिल्ली सल्तनत का ही भाग         है इसलिए दिल्ली सल्तनत के बारें में कुुुुछ               महत्वपूर्ण बातें जान ले।

        दिल्ली सल्तनत (1206 -1526 ई0) 


        राजधानी:       लाहौर (1206 -1210 ई0)
                              बदांयू  (1210 -1214 ई0)
                              दिल्ली (1214 -1327 ई0)
                              दौलताबाद (1327 -1334 ई0)
                              दिल्ली   (1334 -1506 ई0)
                             आगरा  (1506 -1526 ई0)

        भाषा:               फारसी
                                हिंदवी 
        धर्म:                  सुन्नी इस्लाम 
        शासन:              सल्तनत 

        प्रथम सुल्तान:    कुतुबुद्दीन ऐबक
        अंतिम सुल्तान:   इब्राहिम लोदी

        स्थापना:        जून, 1206 ई0
       अंत:              पानीपत का प्रथम युद्ध  (अप्रैल,                             1526 ई0)

     ➢  दिल्ली सल्तनत के बारे महत्वपूर्ण बिंदु


    • 1206 ई0 से 1526 ई0 तक भारत में दिल्ली सल्तनत के पाँच राजवंशों ने शासन किया। इन पाँच राजवंशों के शासनकाल को सल्तनतकाल कहा जाता हैं। यह पाँच राजवंशों निम्न हैं।
    1. गुलाम वंश  (1206 -1290 ई0) 
    2. खिलजी वंश  (1290 -1320 ई0)
    3. तुगलक वंश  (1320 -1398 ई0)
    4. सैयद वंश  (1414 -1451 ई0)
    5. लोदी वंश  (1451 -1526 ई0)

    • तुर्क आक्रमणकारियों द्वारा शासन किए हुए राज्य को ही दिल्ली सल्तनत कहा जाता हैं। 
    • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में सुल्तान राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था।
    • सुल्तान स्वयं को अल्लाह का प्रतिनिधि मानता था। कुरान के नियमों के अनुसार शासन चलाता था।
    • सुल्तान को शासन-कार्य में सहायता देने के लिए मंत्रिपरिषद होती थी।
    • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में चार प्रकार के कर किए जाते थे, खम्स, खराज, जकात और जजिया (सिर्फ हिन्दुओं से)
    • साम्राज्य प्रांतो में बंटे होते थे। प्रत्येक प्रांतो का शासक सूबेदार होता था।
    • प्रधानमंत्री को वजीर कहा जाता था।

    Wednesday, August 15, 2018

    August 15, 2018

    खिलजी वंश



                              खिलजी वंश

        राजधानी:                   दिल्ली 
        भाषा:                         फारसी 
        धर्म:                           सुन्नी इस्लाम 
        शासन:                       सल्तनत 


        प्रथम सुल्तान:         जलालुद्दीन फिरोज खिलजी
       अंतिम सुल्तान:        कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी


                     खिलजी वंश या ख़लजी वंश मध्यकालीन भारत का एक राजवंश था। यह दिल्ली सल्तनत का गुलाम वंश के बाद दूसरा वंश था। इस वंश की स्थापना जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने 1290 ई0 को गुलाम वंश के अंतिम शासक शम्मुद्दीन कैमुर्स के पतन के बाद की थी। खिलजी मूलतः कहाँ के थे इसपर इतिहासकारों में मतभेद है कितुुं अधिक इतिहासकारों ने खिलजीयों को तुर्क माना है। इस वंश का सबसे योग्य शासक अलाउद्दीन खिलजी था। अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली का प्रथम मुस्लिम शासक था जो दक्षिण भारत पर विजय पायी। दक्षिण भारत पर विजय प्राप्त करते समय मलिक काफूर उसका सेेनापति था। खिलजी युग को मुस्लिम शक्ति के विस्तार का युुुग भी कहा जाता हैं। खिलजीयों के शासन के समय मंगोलों का भी आक्रमण हुआ किंतु उन्हे सफलता प्राप्त नहीं हुई। इस वंश ने 1290 ई0 से 1320 ई0 तक शासन किया।

     ➢   खिलजी वंश के बारें में महत्वपूर्ण तथ्य:

    •  जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने गुलाम वंश के शासन को समाप्त कर 13 जून, 1290 ई0 को खिलजी वंश की स्थापना की।
    • इसने किलोखरी को अपनी राजधानी बनाया।
    • जलालुद्दीन फिरोज खिलजी की हत्या उसके दामाद एवं भतीजा अलाउद्दीन खिलजी ने कड़ामानिकपुर (इलाहाबाद) में कर दी।
    • 22 अक्टूबर, 1296 ई0 को अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली का सुल्तान बना।
    • अलाउद्दीन खिलजी के बचपन का नाम अली तथा गुरशास्प था।
    • अलाउद्दीन खिलजी ने सेना को नकद वेतन देने एवं स्थायी सेना रखने जैसों चीजों की शुरुआत की थी।
    • अलाउद्दीन खिलजी ने ही घोड़ा दागने और सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा की शुरुआत भी की थी।
    • अलाउद्दीन ने खस्म  (लूट का धन) में सुल्तान का हिस्सा 1/4 भाग के स्थान पर 3/4 भाग कर दिया।
    • इसने व्यापारियों में बेईमानी रोकने के लिए कम तौलने वाले व्यक्ती के शरीर से मांस काट लेने का आदेश दिया।
    • अलाउद्दीन खिलजी अपनी बाजार व्यवस्था के लिए इतिहास में प्रसिद्ध हैं।
    • दक्षिण भारत की विजय के लिए अलाउद्दीन ने मलिक काफूर को भेजा था। 
    • दक्षिण भारत पर जीत प्राप्त करना अलाउद्दीन खिलजी की बड़ी सफलता मानी जाती हैं।
    • जमैयत खाना मस्जिद, अलाई दरवाजा, सीरी का किला, और हजार खम्भा महल का निर्माण अलाउद्दीन खिलजी ने करवाया था।
    • अलाउद्दीन खिलजी ने स्वयं को सिकंदर-ए-सानी की उपाधि से नवाजा।
    • अमिर खुसरो अलाउद्दीन के दरबारी कवि थे। अमिर खुसरो को सितार और तबले के आविष्कार का श्रेय भी दिया जाता है।
    • अमिर खुसरो का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा में हुआ था। इन्हे तुतिए हिंद (भारत का तोता) के नाम से भी जाना जाता हैं।
    • अलाउद्दीन खिलजी की मृत्य 5 जनवरी, 1316 ई0 को हो गयी थी।

    • कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी 1316 ई0 को दिल्ली के सिंहासन पर बैठा। इसे नग्न स्त्री, पुरुष की संगत पसंद थी।
    • मुबारक खिलजी कभी-कभी राजदरबार में स्त्रियों का वस्त्र पहनकर आ जाता था।
    • बरनी के अनुसार मुबारक खिलजी कभी-कभी नग्न होकर दरबारियों के बीच दौड़ा करता था।
    • मुबारक खाँ ने खलीफा की उपाधि धारण की थी।
    • मुबारक के वजीर खुशरों खाँ ने 15 अप्रैल, 1320 ई0 को इसकी हत्या कर दी और स्वयं दिल्ली के गद्दी पर बैठ गया।
    • खुशरों खाँ ने पैगंबर के सेनापति की उपाधि धारण की।

     ➢  चुकिं खिलजी वंश दिल्ली सल्तनत का ही               भाग है इसलिए दिल्ली सल्तनत के बारें में               कुुुुछ महत्वपूर्ण बातें जान ले।

         दिल्ली सल्तनत (1206 -1526 ई0) 


        राजधानी:       लाहौर (1206 -1210 ई0)
                              बदांयू  (1210 -1214 ई0)
                              दिल्ली (1214 -1327 ई0)
                              दौलताबाद (1327 -1334 ई0)
                              दिल्ली   (1334 -1506 ई0)
                             आगरा  (1506 -1526 ई0)

        भाषा:               फारसी
                                हिंदवी 
        धर्म:                  सुन्नी इस्लाम 
        शासन:              सल्तनत 

        प्रथम सुल्तान:    कुतुबुद्दीन ऐबक
        अंतिम सुल्तान:   इब्राहिम लोदी

        स्थापना:        जून, 1206 ई0
       अंत:              पानीपत का प्रथम युद्ध  (अप्रैल,                             1526 ई0)

     ➢  दिल्ली सल्तनत के बारे महत्वपूर्ण बिंदु


    • 1206 ई0 से 1526 ई0 तक भारत में दिल्ली सल्तनत के पाँच राजवंशों ने शासन किया। इन पाँच राजवंशों के शासनकाल को सल्तनतकाल कहा जाता हैं। यह पाँच राजवंशों निम्न हैं।
    1. गुलाम वंश  (1206 -1290 ई0) 
    2. खिलजी वंश  (1290 -1320 ई0)
    3. तुगलक वंश  (1320 -1398 ई0)
    4. सैयद वंश  (1414 -1451 ई0)
    5. लोदी वंश  (1451 -1526 ई0)

    • तुर्क आक्रमणकारियों द्वारा शासन किए हुए राज्य को ही दिल्ली सल्तनत कहा जाता हैं। 
    • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में सुल्तान राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था।
    • सुल्तान स्वयं को अल्लाह का प्रतिनिधि मानता था। कुरान के नियमों के अनुसार शासन चलाता था।
    • सुल्तान को शासन-कार्य में सहायता देने के लिए मंत्रिपरिषद होती थी।
    • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में चार प्रकार के कर किए जाते थे, खम्स, खराज, जकात और जजिया (सिर्फ हिन्दुओं से)
    • साम्राज्य प्रांतो में बंटे होते थे। प्रत्येक प्रांतो का शासक सूबेदार होता था।
    • प्रधानमंत्री को वजीर कहा जाता था।




    Tuesday, August 14, 2018

    August 14, 2018

    गुलाम वंश

                       दिल्ली सल्तनत

        गुलाम वंश   (1206 ई0-1290 ई0)


        राजधानी:                     लाहौर,दिल्ली 
        भाषा:                          फारसी एवं तुर्क 
        धर्म:                             सुन्नी इस्लाम
        शासन :                        सल्तनत 

        प्रथम सुल्तान :              कुतुबुद्दीन ऐबक
       अतिंम सुल्तान :             शम्मुद्दीन कैमुर्स

                
           गुलाम वंश मध्यकालीन भारत का एक राजवंश था वैसे तो इस वंश के स्थांपक कुतुबुद्दीन ऐबक मुहम्मद गौरी का गुलाम था। तराईन की द्वितीय युद्ध में मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराकर दिल्ली पर कब्जा कर लिया, किन्तु वह जीते हुए प्रदेशों का शासन भार अपने गुलाम सेनानायक को सौंपकर गजनी चला गया।
    मुहम्मद गौरी की 1206 ई0 में म्रत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने स्वयं को दिल्ली का स्वतंत्र राजा घोषित कर गुलाम वंश की नीवं डाली। चुकी वह एक गुलाम था तो उसके वंश का नाम भी गुलाम वंश पड़ा। इस वंश ने 1206 ई0 से 1292 ई0 तक शासन किया।

     गुलाम वंश के बारे महत्वपूर्ण तथ्य :

    • गुलाम वंश की स्थापना 1206 ई0 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने किया था। वह मुहम्मद गौरी का गुलाम था।
    • कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपना राज्याभिषेक 24 जून, 1206 ई0 को करवाया था।
    • कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपनी राजधानी लाहौर में बनवायी थी।
    • दिल्ली का कुवत-उल-इस्लाम मस्जिद एंव अजमेर का ढाई दिन का झोंपड़ा नामक मस्जिद का निर्माण कुतुबुद्दीन ने करवाया था।
    • कुतुबुद्दीन ऐबक ने ही कुतुबमीनार की नींव डाली थी।
    • कुतुबुद्दीन ऐबक को लाख बख्श  (लाखों का दान देनेवाला) भी कहा जाता था।
    • प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने वाला ऐबक का सेनापति बख्तियार खिलजी था।
    • कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु 1210 ई0 में चौगान खेलते समय घोड़े से गिरकर हो गयी। इसे लाहौर में दफनाया गया।
    • ऐबक का उत्तराधिकारी आरामशाह हुआ जिसने सिर्फ आठ महिनों तक शासन किया।

    • आरामशाह की हत्या करके इल्तुतमिश 1211 ई0 में दिल्ली की गद्दी पर बैठ गया।
    • इल्तुतमिश तुर्कीस्तान का इल्बरी तुर्क था, जो ऐबक का गुलाम एंव दामाद था। ऐबक की मृत्यु के समय वह बदायूँ का गवर्नर था।
    • इल्तुतमिश ने अपनी राजधानी लाहौर से दिल्ली लायी।
    • इल्तुतमिश द्वारा किए गए महत्त्वपूर्ण कार्य निम्न हैं।
    1. कुतुबमीनार के निर्माण को पुरा करवाया।   
    2. सबसे पहले शुद्ध अरबी सिक्के जारी किए।
    3. इक्ता प्रणाली चलाई।
    4. सर्वप्रथम दिल्ली के अमीरों का दमन किया।
    5. चालीस गुलाम सरदारों का संगठन बनाया, जो तुर्कान-ए-चिहलगानी के नाम से जाना गया।

    • इल्तुतमिश पहला शासक था, जिसने 1229 ई0 में बगदाद के खलीफा से सुल्तान पद की वैधानिक स्वीकृति प्राप्त की।
    • इल्तुतमिश की म्रत्यु अप्रैल, 1236 ई0 में हो गयी।
    • इल्तुतमिश की म्रत्यु के बाद उसका पुत्र रुकनुद्दीन फिरोज गद्दी पर बैठा। वह एक अयोग्य शासक था उसके अल्पकालीन शासन पर उसकी माँ शाह तुरकान छाई रही।
    • शाह तुरकान के अधिक प्रभाव से परेशान होकर तुर्की अमीरों ने रुकनुद्दीन फिरोज को हटाकर रजिया बेगम को सिंहासन पर बैठा दिया। इस तरह रजिया बेगम दिल्ली की पहली मुस्लिम महिला शासक बनी।
    • रजिया ने पर्दाप्रथा को त्यागकर खुले मुँह राजदरबार में आया करती थी।
    • गैर तुर्क को सामंत बनाने के प्रयासों से तुर्क अमीर उसके विरुद्ध हो गए और उसे गद्दी से हटा दिया।

    • रजिया को गद्दी से हटाकर तुर्क अमीरों ने मुईजुद्दीन बहरामशाह को गद्दी पर बैठाया।
    • रजिया की हत्या 13 अक्टूबर, 1240 ई0 को डाकुओं के द्वारा कैथल के पास कर दी गई।
    • मुईजुद्दीन बहरामशाह की भी हत्या मई 1242 ई0 में कर दी गई।
    • मुईजुद्दीन बहरामशाह के बाद दिल्ली की गद्दी पर अलाउद्दीन मसूद शाह बैठा।
    • बलबन ने षड्यंत्र के द्वारा 1246 ई0 में अलाउद्दीन मसूद शाह को सुल्तान के पद से हटाकर नासिरुद्दीन महमूद को सुल्तान बनावा दिया।
    • नासिरुद्दीन महमूद ऐसा सुल्तान था जो टोपी सीकर अपना जीवन-यापन करता था।
    • बलबन ने अपनी पुत्री का विवाह नासिरुद्दीन महमूद के साथ किया था।
    • बलबन का वास्तविक नाम बहाउद्दीन था। वह इल्तुतमिश का गुलाम था।
    • तुर्कान-ए-चिहलगानी ( इल्तुतमिश के द्वारा बनाया गया चालीस गुलाम सरदारों का संगठन) का विनाश बलबन ने किया था।

    • बलबन 1266 ई0 में गियासुद्दीन बलबन के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा। यह मंगोलों के आक्रमण से दिल्ली की रक्षा करने में सफल रहा।
    • बलबन ने राजदरबार में सिजदा  और पैबोस प्रथा की शुरुआत की थी।
    • बलबन ने फारसी रीति-रिवाज पर आधारित नवरोज उत्सव को शुरु करवाया।
    • अपने विरोधियों के प्रति बलबन कठोर 'लौह एवं रक्त' की नीति का पालन करता था।
    • नासिरुद्दीन महमूद ने बलबन को उलूँग खाँ की उपाधि प्रदान की।
    • गुलाम वंश का अंतिम शासक शम्मुद्दीन कैमुर्स था।

    नोट:  बलबन के राजदरबार में फारसी के प्रसिद्ध कवि           अमिर खुसरो और अमिर हसन रहते थे।



    ➢   चुकिं गुलाम वंश दिल्ली सल्तनत का ही भाग           है इसलिए दिल्ली सल्तनत के बारें में कुुुुछ               महत्वपूर्ण बातें जान ले।

          दिल्ली सल्तनत (1206 -1526 ई0) 


          राजधानी:       लाहौर (1206 -1210 ई0)
                                बदांयू  (1210 -1214 ई0)
                                दिल्ली (1214 -1327 ई0)
                                दौलताबाद (1327 -1334 ई0)
                                दिल्ली   (1334 -1506 ई0)
                               आगरा  (1506 -1526 ई0)

          भाषा:               फारसी
                                  हिंदवी 
          धर्म:                  सुन्नी इस्लाम 
          शासन:              सल्तनत 

          प्रथम सुल्तान:    कुतुबुद्दीन ऐबक
          अंतिम सुल्तान:   इब्राहिम लोदी

          स्थापना:        जून, 1206 ई0
         अंत:              पानीपत का प्रथम युद्ध  (अप्रैल,                             1526 ई0)

       ➢  दिल्ली सल्तनत के बारे महत्वपूर्ण बिंदु


      • 1206 ई0 से 1526 ई0 तक भारत में दिल्ली सल्तनत के पाँच राजवंशों ने शासन किया। इन पाँच राजवंशों के शासनकाल को सल्तनतकाल कहा जाता हैं। यह पाँच राजवंशों निम्न हैं।
      1. गुलाम वंश  (1206 -1290 ई0) 
      2. खिलजी वंश  (1290 -1320 ई0)
      3. तुगलक वंश  (1320 -1398 ई0)
      4. सैयद वंश  (1414 -1451 ई0)
      5. लोदी वंश  (1451 -1526 ई0)

      • तुर्क आक्रमणकारियों द्वारा शासन किए हुए राज्य को ही दिल्ली सल्तनत कहा जाता हैं। 
      • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में सुल्तान राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था।
      • सुल्तान स्वयं को अल्लाह का प्रतिनिधि मानता था। कुरान के नियमों के अनुसार शासन चलाता था।
      • सुल्तान को शासन-कार्य में सहायता देने के लिए मंत्रिपरिषद होती थी।
      • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में चार प्रकार के कर किए जाते थे, खम्स, खराज, जकात और जजिया (सिर्फ हिन्दुओं से)
      • साम्राज्य प्रांतो में बंटे होते थे। प्रत्येक प्रांतो का शासक सूबेदार होता था।
      • प्रधानमंत्री को वजीर कहा जाता था।

      Monday, August 13, 2018

      August 13, 2018

      भारत पर अरबों का आक्रमण


      • मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में अरबों ने भारत पर पहला सफल आक्रमण किया।
      • अरबों ने सिंध पर 712 ई0 में विजय पायी थी।
      •  अरब आक्रमण के समय सिंध पर दाहिर का शासन था।
      • भारत पर अरबवासियों के आक्रमण का मुख्य उद्देश्य धन-दौलत लूटना तथा इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार करना था।

        महमूद गजनी

      • अलप्तगीन नामक एक तुर्क सरदार गजनी साम्राज्य का संस्थापक था। 
      •  अलप्तगीन का गुलाम तथा दामाद सुबुक्तगीन था।
      • महमूद गजनी सुबुक्तगीन का पुत्र था।
      • अपने पिता के समय गजनी खुरासान का शासक था।
      • महमूद गजनी 27 वर्ष की अवस्था में 998 ई0 में गद्दी पर बैठा।
      • बगदाद का खलीफा अल-आदिर बिल्लाह ने महमूद गजनी के पद को मान्यता प्रदान करते हुए उसे 'यमीन-उद्-दौला' तथा 'यमीन-ऊल-मिल्लाह' की उपाधि दी।
      • महमूद गजनी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया।
      • महमूद गजनी ने भारत पर पहली बार 1001 ई0 में आक्रमण किया। यह आक्रमण शाही राजा जयपाल के विरूद्ध था। इसमें जयपाल की पराजय हुई थी।
      • महमूद गजनी का 1008 ई0 में नगरकोट के विरुद्ध हमले को मुर्तिवाद के विरूद्ध पहली महत्वपूर्ण जीत बतायी जाती है।
      • महमूद गजनी ने थानेसर के चक्रस्वामिन की कास्य निर्मित आदमकद प्रतिमा को गजनी भेजकर रंगभूमी में रखवाया।
      • महमूद गजनी का सबसे चर्चित आक्रमण 1025 ई0 में सोमनाथ मंदिर  (सौराष्ट्र) पर हुआ, जिसमें सोमनाथ मंदिर को लूटा गया था। 
      • सोमनाथ मंदिर की लूट में माना जाता है उसे करीब 20 लाख दीनार की सम्पत्ति हाथ लगी थी।
      • सोमनाथ मंदिर लूट के ले जाने के क्रम में महमूद गजनी पर जाटों ने हमला किया था।
      • महमूद गजनी का अंतिम भारतीय आक्रमण 1027 ई0 में जाटों के विरुद्ध था।
      • महमूद गजनी के दरबार में अलबरूनी, फिरदौसी, उत्बी, तथा फरूखी रहते थे।
        मुहम्मद गौरी

      •  गौर महमूद गजनी के अधीन एक छोटा-सा राज्य था। 1173 ई0 में शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी गौर का शासक बना।
      • मुहम्मद गौरी ने भारत पर पहला आक्रमण 1175 ई0 में मुल्तान के विरूद्ध किया था। 
      • मुहम्मद गौरी का दूसरा आक्रमण 1178 ई0 में पाटन  (गुजरात) पर हुआ। यहाँ का शासक भीम-II ने गौरी को बुरी तरह परास्त किया। 
      • तराईन का प्रथम युद्ध 1191 ई0 में गौरी एंव पृथ्वीराज चौहान के बीच हुआ, जिसमें पृथ्वीराज चौहान की विजय हुई। 
      • तराईन का द्वितीय  युद्ध 1192 ई0 में गौरी और चौहान के बीच हुआ। इसमें गौरी को विजय प्राप्त हुई।
      • चंदावर का युद्ध 1194 ई0 गौरी और जयचंद के बीच हुआ। इसमें भी गौरी को विजय प्राप्त हुई।
      • मुहम्मद गौरी भारत के जीते हुए प्रदेशों का शासन भार अपने गुलाम सेनापत्तियों को सौंपते हुए गजनी लौट गया।
      • मुहम्मद गौरी की हत्या 15 मार्च, 1206 ई0 को कर दी गई ।


      Sunday, August 12, 2018

      August 12, 2018

      भक्ति आन्दोलन के बारे जाने।


                         भक्ति आन्दोलन


      • भक्ति आन्दोलन की शुरूआत छठी शताब्दी ई0 में तमिल क्षेत्र से हुई जो कर्नाटक और महाराष्ट्र में फैल गई।
      • भक्ति आन्दोलन का विकास बारह अलवार वैष्णव संतो और तिरसठ नयनार शैव संतो ने किया।
      • शैव संत अप्पार ने पल्लव राजा महेन्द्रवर्मन को शैव धर्म स्वीकार करवाया।
      • भक्ति कवि-संतो को संत कहा जाता था। और इनके दो समूह थे। प्रथम समूह वैष्णव संत थे जो महाराष्ट्र में लोकप्रिय हुए। वे भगवान विठोबा के भक्त थे। विठोबा पंथ के संत और उनके अनुयायी वरकरी या तीर्थयात्री कहलाते थे, क्योंकि हर वर्ष पंढरपुर की तीर्थयात्रा पर जाते थे। दुसरा समूह पंजाब और राजस्थान के हिंदी भाषी क्षेत्रों में सक्रिय था। 
      • भक्ति आन्दोलन को दक्षिण भारत से उत्तर भारत में 12वीं शताब्दी के प्रारंभ में रामानंद के द्वारा लाया गया।
      • रामानंद की शिक्षा से दो संप्रदायों का जन्म हुआ, सगुण जो पुनर्जन्म में विश्वास रखता है और निर्गुण जो भगवान के निराकार रूप को पूजता है।
      • सगुण संप्रदाय के सबसे प्रसिद्ध व्याख्याताओं में थे, तुलसीदास और नाभादास जैसे राम भक्त और मीराबाई, चैतन्य, सूरदास, और वल्लभाचार्य जैसे कृष्ण भक्त 
      • निर्गुण संप्रदाय के सबसे प्रसिद्ध प्रतिनिधि कबीर थे, जिन्हे उत्तर भारतीय पंथों का आध्यात्मिक गुरु माना गया है। 
       भक्ति आन्दोलन के प्रमुख संत 

      रामानुजाचार्य: इन्होने राम को अपना आराध्य माना। इनका जन्म 1017 ई0 में मद्रास के निकट पेरूम्बर नामक स्थान पर हुआ था। रामानुजाचार्य ने वेदांत में शिक्षा अपने गुरु, कांचीपुरम के यादव प्रकाश से प्राप्त किया था।

      रामानंद: रामानंद का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रयाग में हुआ था। इनकी शिक्षा प्रयाग और वाराणसी में हुई। इन्होने अपना संप्रदाय सभी जातियों के लिए खोल दिया। रामानुजाचार्य के भाँति इन्होने भी भक्ति को मोक्ष का एकमात्र साधन माना।

      कबीर: कबीर का जन्म 1425 ई0 में एक विधवा बाह्यणी के गर्भ से हुआ था, लेकिन इनका पालन पोषण एक जुलाहा के घर पर हुआ। इन्होने राम, रहीम, हजरत, अल्लाह आदि को एक ही ईश्वर के अनेक रूप माना। इन्होंने जाति-प्रथा, धार्मिक कर्मकांड, मुर्तिपूजा, जप-तप और अवतारवाद आदि का विरोध किया और निराकार एंव एकेश्वरवाद की उपासना को महत्त्व दिया। कबीर के उपदेश सबद सिक्खों के आदिग्रंथ में संगृहीत हैं।

      गुरु नानक:  गुरु नानक का जन्म 1469 ई0 में पजांब (पाकिस्तान) के तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था। उन्होंने देश का पाँच बार चक्कर लगाया, जिसे उदासीस कहा जाता हैं। उन्होंने कीर्तनों के माध्यम से उपदेश दिए। गुरु नानक ने सिख धर्म की स्थापना की। गुरु नानक सूफी संत बाबा फरीद से प्रभावित थे।

      चैतन्य स्वामी: चैतन्य स्वामी का जन्म 1486 ई0 में नदिया (बंगाल) के मायापुर गाँव में हुआ था। इन्होंने गोसाई संघ की स्थापना की और साथ ही संकीर्तन प्रथा की शुरुआत की। इनके दार्शनिक सिद्धांत को अचिंत्य भेदाभेदवाद के नाम से जाना जाता हैं। संन्यास लेने के बाद इन्होंने पुरी में भगवान जगन्नाथ की दो दशक तक उपासना की।

      गोस्वामी तुलसीदास: इनका जन्म उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में राजापुर गाँव में 1554 ई0 में हुआ था। इन्होने रामचरितमानस की रचना की।

      रैदास: ये जाति से चमार थे। ये रामानंद के बारह शिष्यों में से एक थे। ये जूता चप्पल बनाकर जीविका चलाया करते थे। मीराबाई ने इन्हे अपना गुरु माना हैं। इन्होने रायदासी सम्प्रदाय की स्थापना की।

      दादू-दयाल: ये कबीर के अनुयायी थे। इनका जन्म 1554 ई0 में अहमदाबाद में हुआ था। इनका संबंध धुनिया जाति से था। साँभर में आकर इन्होने ब्रह्म सम्प्रदाय की स्थापना की। अकबर ने धार्मिक चर्चा के लिए इन्हें एक बार फतेहपुर सीकरी बुलाया था।



      Saturday, August 11, 2018

      August 11, 2018

      सूफी आन्दोलन के बारे में जानें।

                                

                               सूफीवाद


         सूफीवाद या तसव्वुफ इस्लाम का रहस्यवादी पंथ           माना जाता हैं। इनके पंथियो को सूफी कहा जाता हैं।     माना जाता है कि सूफीवाद का जन्म इराक के बसरा     शहर में करीब एक हजार वर्ष पहले हुआ। भारत में       इसके पहुँचने का कोई अधिकारीक समय के बारे           नहीं कहा जा सकता लेकिन भारत में इसका प्रचार       प्रसार ख्वाजा मुईनुददीन चिश्ती ने की।

      •  जो लोग सुफी संतो से शिष्यता ग्रहण करते थे, उन्हे मुरीद कहा जाता था।
      • सूफी जिन आश्रमों में निवास करते थे उन्हे खानकाह या मठ कहा जाता था।
      • सूफियों के धर्मसंघ दो भाग में विभाजित थे। बा-शारा (इस्लामी सिध्दांत के समर्थक) और बे-शारा  (इस्लामी सिध्दांत से बँधे नहीं)

      • भारत में चिश्ती एवं सुहरावर्दी सिलसिले की जड़ें काफी गहरी थीं।
      • 1192 ई0 में मोहम्मद गोरी के ख्वाजा मुईनुददीन चिश्ती भारत आए। इन्होने भारत में चिश्ती परम्परा की शुरूआत की।
      • चिश्ती परम्परा का मुख्य केंद्र अजमेर था।
      • चिश्ती परम्परा के कुछ महत्वपूर्ण संत थे। निजामुद्दीन औलिया, बाबा फरीद, बख्तियार काकी एवं शेख बुरहानुददीन गरीब ।
      • बाबा फरीद की रचनाएँ गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल हैं।


      • बख्तियार काकी के शिष्य बाबा फरीद थे।
      • बाबा फरीद के शिष्य निजामुद्दीन औलिया थे।
      • निजामुद्दीन औलिया ने अपने जीवनकाल में सात सुल्तानों का शासन देखा था। निजामुद्दीन औलिया के प्रमुख शिष्य शेख सलीम चिश्ती, अमीर खुसरो,अमीर हसन देहलवी।
      • शेख बुरहानुददीन गरीब ने 1340 ई0 में दक्षिण भारत के क्षेत्रों में चिश्ती सम्प्रदाय की शुरुआत की और दौलताबाद को मुख्य केंद्र बनाया।
      • सूफियों के सुहरावर्दी धर्मसंघ की स्थापना शेख शिहाबुददीन उमर सुहरावर्दी ने की, किन्तु इसके सुदृढ़ संचालन का श्रेय शेख बदरूददीन जकारिया को जाता है। इन्होने सिंध और मुल्तान को मुख्य केंद्र बनाया।

      • सुहरावर्दी धर्मसंघ के प्रमुख संत थे- जलालुददीन तबरीजी, सैय्यद सुर्ख जोश, बुरहान आदि।
      • सुहरावर्दी धर्मसंघ ने राज्य के संरक्षण को स्वीकार किया था।
      • कादरी धर्मसंघ की स्थापना सैय्यद अबुल कादिर अल जिलानी ने की थी। इस धर्मसंघ के अनुयायी गाने-बजाने के विरोधी थे।
      • दारा शिकोह  (शाहजहां का ज्येष्ठ पुत्र) कादरी धर्मसंघ का अनुयायी था। दारा शिकोह के गुरू मुल्लाशाह थे।
      • सत्तारी धर्मसंघ की स्थापना शेख अब्दुल्ला सत्तारी ने की थी। इसका मुख्य केंद्र बिहार था।
      • नक्शबंदी धर्मसंघ की स्थापना ख्वाजा उबेदुलला ने की थी। भारत में इस धर्मसंघ का प्रचार शेख अहमद सरहिंद ने की थी।









      Tuesday, May 8, 2018

      May 08, 2018

      शिवाजी के पश्चात मराठा साम्राज्य ।

                          मराठा साम्राज्य 


      राजधानी--  :  रायगड़, जिंजी, सातारा, पूणे                                                         
      भाषा--        : मराठी और संस्कृत

      मुद्रा--          :   रूपया, पैसा, मोहर, होन एवं                                शिवराय 

      धर्म--           :   हिन्दू धर्म 

      शासन--       :   राजतंत्र 
      विधानमंडल :   अष्टप्रधान

      क्षत्रपति--   :  शिवाजी     (प्रथम)    (1645-1680)
                          प्रताप सिंह  (अंतिम)  (1808-1818)

      पेशवा--    :   मोरोपंत पिंगले (प्रथम)(1674-1889)
                         बाजीराव-II    (अंतिम) (1803-1818)
                            

      • शिवाजी का उत्तराधिकारी शम्भाजी था।
      • शम्भाजी ने उज्जैन के हिंदी एवं संस्कृत के प्रकांड विद्वान कवि कलस को अपना सलाहकार नियुक्त किया।
      • 21 मार्च, 1689 ई0 को मुगल सेनापति मखर्रम खाँ ने संगमेश्वर में छिपे हुए शम्भाजी एवं कवि कलस को गिरफ्तार कर लिया और उसकी हत्या कर दी।
      • शम्भाजी के बाद 1689 ई0 में राजा राम को नए छत्रपति केे रूप में राज्याभिषेक किया गया।
      • राजा राम ने अपनी दूसरी राजधानी सतारा को बनाया।
      • राजाराम मुगलों से संघर्ष करता हुआ 1700 ई0 में मारा गया।
      • राजाराम की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी ताराबाई अपने 4 वर्षीय पुत्र  शिवाजी- II का राज्याभिषेक करवाकर मराठा साम्राज्य की वास्तविक संरक्षिका बन गई।
      • 1707 ई0 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद शम्भाजी के पुत्र साहू ( जो औरंगजेब के कब्जे में था) वापस महाराष्ट्र आया।
      • साहू एवं ताराबाई के बीच 1707 ई0 में खेड़ा का युद्ध हुआ। 
      • साहू ने 22 जनवरी, 1708 ई0 को सतारा में अपना राज्याभिषेक करवाया।
      • साहू के नेतृत्व में नवीन मराठा साम्राज्यवाद के प्रवर्तक पेशवा लोग थे, जो साहू के पैतृक प्रधानमंत्री थे। पेशवा पद पहले पेशवा के साथ वंशानुगत हो गया था
      • 1707 ई0 में साहू ने बालाजी विश्वनाथ को पेशवा बनाया। इनकी मृत्यु 1720 ई0 में हुई। 
      • बालाजी विश्वनाथ के बाद बाजीराव I पेशवा बना।
      • पेशवा बाजीराव प्रथम ने मुगल साम्राज्य की कमजोर हो रही स्थिति का फायदा उठाने के लिए साहू को उत्साहित करते हुए कहा कि     "आओ, हम इस पुराने वृक्ष के खोखले तने पर प्रहार करें, शाखाएँ तो स्वयं गिर जाएगी, हमारे प्रयत्नों से मराठा पताका कृष्णा नदी से अटक तक फहराने लगेगी"  उत्तर में साहू ने कहा - "निश्चित रूप से ही  आप इसे हिमालय के पार गाड़ देंगे, नि:संदेह आप योग्य पिता के योग्य पुत्र है "
      • पालखेड़ा का युद्ध 7 मार्च, 1728 ई0 बाजीराव प्रथम और निजामुलमुल्क के बीच हुआ जिसमें निजाम की हार हुई। निजाम के साथ मुंशी शिवगाँव की संधि हुई।
      • दिल्ली पर आक्रमण करने वाला प्रथम पेशवा बाजीराव प्रथम था,जिसने 29 मार्च, 1737 ई0 को दिल्ली पर धावा बोला था। उस समय मुगल बादशाह मुहम्मदशाह दिल्ली छोड़ने के लिए तैयार हो गया था।
      • बाजीराव प्रथम मस्तानी नामक महिला से संबंध होने के कारण चर्चित रहा था।
      • 1740 ई0 में बाजीराव प्रथम की मृत्यु हो गयी।
      • बाजीराव प्रथम के बाद बालाजी बाजीराव 1740 ई0 में पेशवा बना।
      • पेशवा बालाजी बाजीराव को नाना साहेब के नाम से भी जाना जाता था।
      • 1750 ई0 में संगोला संधि के बाद पेशवा के हाथ में सारे अधिकार सुरक्षित हो गए।
      • झलकी की संधि हैदराबाद के निजाम एंव बालाजी बाजीराव के मध्य हुई।
      • बालाजी बाजीराव के समय में ही पानीपत का तृतीय युद्ध  (14 जनवरी, 1761 ई0) हुआ, जिसमें मराठों की हार हुई। इस हार को नहीं सह पाने के कारण बालाजी बाजीराव की मृत्यु 23 जून,  1761 ई0 में हो गयी।
      • बालाजी बाजीराव की मृत्यु के बाद माधवराव नारायन प्रथम 1761 ई0 में पेशवा बना। इसने मराठों की खोयी हुई प्रतिष्ठा को पुन: प्राप्त करने का प्रयास किया।
      • माधवराव ने ईस्ट इंडिया कंपनी की पेंशन पर रह रहे मुगल बादशाह शाह आलम-II को पुन: दिल्ली की गद्दी पर बैठाया। मुगल बादशाह अब मराठों का पेंशनभोगी बन गया।
      • माधवराव की बीमारी के कारण 18 नवम्बर, 1772 ई0 को केवल 27 वर्ष के आयु में निधन हो गया। उसकी मृत्यु से मराठों को बड़ा धक्का लगा।
      • माधवराव की मृत्यु के बाद उसका भाई नारायणराव पेशवा बना। किन्तु कुछ समय बाद  नारायणराव की हत्या उसके चाचा रघुनाथ राव (राघोवा) ने करवा के स्वयं पेशवा बन गया।
      • नाना फड़नवीस ने राघोवा का विरोध किया और मराठों का एक दल बनाकर नारायणराव के अल्पायु पुत्र माधवराव नारायण-II को पेशवा घोषित कर दिया।
      • माधवराव नारायण- II अल्पायु होने कारण मराठा राज्य की देख-रेख बारहभाई सभा नाम की 12 सदस्यों की एक परिषद करती थी। इस परिषद के दो महत्वपूर्ण सदस्य महादजी सिंधिया एवं नाना फड़नवीस थे।

      ➢ प्रथम आँग्ल-मराठा युद्ध : 1775-82 ई0 तक           चला। इसके बाद 1776 ई0 में पुरंदर की संधि हुई।     इसके तहत कंपनी ने रघुनाथ राव (राघोवा) के           समर्थन को वापस लिया। 17 मई, 1782 को               सालाबाई की संधि के तहत यह युुुुद्ध समाप्त हुआ।     इस युुद्ध मेें मराठों की जीत हुई थी।

      ➢ द्वितीय आँग्ल-मराठा युद्ध : 1803-1805 ई0           इसमें भोंसले (नागपुर) ने अंग्रेजों को चुनौती दी।           इसके फलस्वरूप 7 सितम्बर, 1803 ई0 को               देवगावँ की संधि हुई। इस युुुुद्ध में अंग्रेजो की जीत       हुई।

      ➢ तृतीय आँग्ल-मराठा युद्ध : 1816-1818 ई0 में         हुआ। इसी युद्ध से मराठों का पतन हो गया और           पेशवा के वंशानुगत पद को समाप्त कर दिया। इस         युद्ध मेें अंग्रेेेजो की निर्णायक जीत हुई।

      •  अंतिम पेशवा राघोवा का पुत्र बाजीराव-II था, जो अंग्रेज की सहायता से पेशवा बना था। मराठों के पतन में सर्वाधिक योगदान इसी का था। यह सहायक संधि स्वीकार करने वाला प्रथम मराठा सरदार था।
      • पेशवा बाजीराव-II ने कोरेगावँ एवं अष्टी के युद्ध मेें हारने के बाद फरवरी 1818 ई0 में मेल्कन के सम्मुख आत्मसमर्पण कर दिया। अंग्रेजों ने पेशवा के पद को समाप्त कर बाजीराव- II को कानपुर के निकट बिठूर में पेंशन पर जीने के लिए भेज दिया, जहाँ 1853 ई0 में इसकी मृृत्यु हो गयी।

      ➤   अंग्रेज-मराठा संघर्ष के अन्तर्गत होनेवाली                प्रमुख संधियाँ.
         
                 संधियाँ                          वर्ष 
      ➢ सूरत की संधि                      1775
      ➢ पुरंदर की संधि                     1776
      ➢ बड़गावँ की संधि                  1779
      ➢ सालाबाई की संधि                1782
      ➢ बसीन की संधि                    1802
      ➢ देवगाँव की संधि                  1803

      ➢ सुर्जी अर्जुनगावँ की संधि        1803
      ➢ राजापुर घाट की संधि            1804
      ➢ नागपुर की संधि                   1816
      ➢ ग्वालियर की संधि                 1817
      ➢ पूना की संधि                       1817
      ➢ मंडसौर की संधि                  1818



      May 08, 2018

      मराठा साम्राज्य के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारियां ।

                             मराठा साम्राज्य 


      राजधानी--    :  रायगड़, जिंजी,सातारा ,पूणे
      भाषा--        :   मराठी और संस्कृत
      मुद्रा--          :   रूपया, पैसा, मोहर, होन एवं                                 शिवराय 
      धर्म--           :   हिन्दू धर्म 
      शासन--       :   राजतंत्र 
      विधानमंडल :   अष्टप्रधान 

      क्षत्रपति--   :  शिवाजी     (प्रथम)    (1645-1680)
                          प्रताप सिंह  (अंतिम)  (1808-1818)

      पेशवा--    :   मोरोपंत पिंगले (प्रथम)(1674-1889)
                         बाजीराव-II    (अंतिम) (1803-1818)


      • मराठा साम्राज्य के संस्थापक शिवाजी थे ।
      • शिवाजी का जन्म 1627 ई0 में शिवनेरी दुर्ग  (पूणे जिला) महाराष्ट्र में हुआ था।
      • शिवाजी के पिता का नाम शाहजी भोंसले एवं माता का नाम जीजाबाई था ।
      •  शाहजी भोंसले की दूसरी पत्नी का नाम तुकाबाई मोहिते था ।
      • शिवाजी के गुरु कोंणदेव थे।
      • आध्यात्मिक क्षेत्र में शिवाजी के आचरण पर गुरु रामदास का काफी प्रभाव था।
      • शिवाजी के पिता शाहजी भोंसले ने उन्हे पूना की जागीर प्रदान कर स्वंय बीजापुर रियासत में नौकरी कर ली।
      • शिवाजी ने अपने सैन्य अभियान के अन्तर्गत सर्वप्रथम 1644 ई0 बीजापुर के तोरण नामक पहाड़ी किले पर अधिकार किया।
      • 1656 ई0 में शिवाजी ने रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया।
      • बीजापुर के सुल्तान ने अपने योग्य सेनापति अफजल खाँ को सितम्बर,1665 ई0 में शिवाजी को पराजित करने के लिए भेजा। शिवाजी ने अफजल खाँ की हत्या कर दी।
      • शिवाजी और महाराजा जयसिंह के मध्य पुरंदर की संधि 1665 ई0 में संपन्न हुई।
      • शिवाजी ने सूरत को 1664 एवं 1679 ई0 में लुटा।



      • औरंगजेब ने शिवाजी को 16 मई,1666 ई0 में जयपुर भवन में कैद कर लिया, जहाँ से वे 16 अगस्त,1666 ई0 को भाग निकले।
      • 1672 ई0 में शिवाजी ने पंहाला दुर्ग को बीजापुर से छिना।
      • 16 जुन, 1674 ई0 को शिवाजी ने रायगढ़ में वाराणसी  (काशी) के प्रसिद्ध विद्वान श्री गंगाभट्ट द्वारा अपना राज्याभिषेक करवाया। मूल रुप से गंगाभट्ट महाराष्ट्र का एक सम्मानित ब्राह्मण था, जो लंबे समय से वाराणसी में रह रहा था।
      • मात्र 53 वर्ष की आयु में 14 अप्रैल, 1680 ई0 को शिवाजी की मृत्यु हो गयी।
      • शिवाजी के मंत्रिमंडल को अष्टप्रधान कहा जाता था।

      • अष्टप्रधान के निम्न पद थे।
      1. पेशवा  (प्रधानमंत्री) 
      2. सरी-ए-नौबत  (सेनापति)
      3. अमात्य (राजस्व मंत्रि) 
      4. सुमंत    ( विदेश मंत्रि)
      5. वाकयानवीस   - सुचना,गुप्तचर एंव संधि-विग्रह के                               विभागों का अध्यक्ष।
      6. चिटनीस        -  राजकीय पत्रों को पढकर उसकी                              भाषा-शैली को देखना।
      7. पंडित राव     -  धार्मिक कार्यों के लिए तिथी का                                निर्धारण करना।
      8. न्यायधीश      -  न्याय विभाग का प्रधान।

      नोट  :  लोकमान्य तिलक ने 1895 ई0 में शिवाजी               जयन्ती की शुरुआत की थी।

      Monday, May 7, 2018

      May 07, 2018

      विजयनगर साम्राज्य के बारे में रोचक जानकारी ।

                             

                         विजयनगर साम्राज्य

      राजधानी--  :     विजयनगर (वर्तमान हंपी) 
      भाषा--        :     तेलुगू, संस्कृत, कन्नड 
      धर्म--          :      हिन्दू धर्म 
      मुद्रा--         :      पेगोडा 
      शासन--      :     राजतंत्र 
      राजा--        :     हरिहर-I (प्रथम) 
                              श्रीरंगा-III (अंतिम) 
      स्थापना--    :    1336 ई0
      अंत--          :    1646 ई0


      • विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ई0 में हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने  की थी । विजयनगर का शाब्दिक अर्थ होता है -  जीत का शहर 
      • हरिहर और बुक्का पहले काकतीय शासक प्रताप रुद्रदेव के सेवक थे । 
      • हरिहर और बुक्का ने विजयनगर साम्राज्य की स्थापना विद्यारणय संत से आशिर्वाद प्राप्त कर की थी । 
      • हरिहर और बुक्का ने अपने पिता संगम के नाम पर संगम राजवंश की स्थापना  की ।
      • विजयनगर साम्राज्य पर क्रमश: राजवंश ने शासन किया -- संगम, सलुब, तुलुब, एवं अरावीडु वंश । 
      • विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी थी । इसकी राजभाषा तेलुगू थी । इस साम्राज्य के खण्डहर आज तुंगभद्रा नदी पर  स्थित है ।
      • हरिहर- II ने संगम शासकों में सबसे पहले महाराजाधिराज की उपाधि धारण की ।
      •  सगंम शासक देवराय प्रथम के शासनकाल में इटली का यात्री निकोलो कांटी विजयनगर की यात्रा पर आया था ।
      • संगम वंश का सबसे प्रतापी राजा देवराय II था। इसे इमाडिदेवराय भी कहा जाता था ।
      • देवराय- II के शासनकाल में फारसी राजदूत अब्दुल रज्जाक विजयनगर आया था ।
      • प्रसिद्ध तेलुगू कवि श्रीनाथ कुछ दिन तक देवराय-II के दरबार में रहे ।
      • सालुव नरसिंह ने विजयनगर में दूसरे राजवंश सालुव वंश  (1485-1506) की स्थापना की ।
      ➤ संगम वंश के प्रमुख शासक

             शासक                        वर्ष 
      ➢ हरिहर                  1336-1356 ई0
      ➢ बुक्का                  1356-1377 ई0
      ➢ हरिहर-II              1377-1404 ई0
      ➢ देवराय                 1406-1422 ई0
      ➢ देवराय- II            1426-1446 ई0
      ➢ मल्लिकार्जुन          1446-1466 ई0
      ➢ विरूपाझ-II          1466-1485 ई0

      • वीर नरसिंह ने तुलुव वंश (1505-1565) की स्थापना की ।
      • तुलुव वंश का महान शासक कृष्णदेव राय था। वह 8 अगस्त, 1509 को शासक बना।
      • कृष्णदेव राय का योग्यमंत्री एंव सेनापति सालुव तिमा था।
      • कृष्णदेवराय के शासनकाल में पुर्तगाल यात्री डोमिगोस पायस विजयनगर आया था।
      • बाबर ने अपनी आत्मकथा 'बाबरनामा' में कृष्णदेवराय को भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक बताया।
      • कृष्णदेवराय के शासनकाल को तेलुगु साहित्य का 'क्लासिक युग' कहा गया है।
      • कृष्णदेवराय ने नागलपुर नामक नए नगर , हमारा एवं विट्ठलस्वामी मंदिर का निर्माण करवाया था।
      • कृष्णदेवराय ने आन्ध्रभोज, अभिनव भोज, आन्ध्र पितामह आदि उपाधि धारण की थी।
      • कृष्णदेव राय की म्रत्यु 1529 ई0 में हो गयी।
      • तुलुव वंश का अंतिम शासक सदाशिव था।
      • तालिकोटा का युद्ध 25 जनवरी,1565 ई0 में हुआ । इसी युद्ध के कारण विजयनगर का पतन हुआ।
      • तालिकोटा युद्ध में विजयनगर का नेतृत्व राम राय कर रहा था।

      • तालिकोटा के युद्ध के बाद सदाशिव ने तिरुमल के सहयोग से पेनूकोंडा को राजधानी बनाकर शासन प्रारंभ किया।
      • विजयनगर के चौथे राजवंश अरावीडु वंश (1570-1650 ई0) की स्थापना  तिरुमल ने सदाशिव को अपदस्थ कर पेनूकोंडा में किया।
      • अरावीडु शासक वेंकट-II के शासनकाल में ही वोडेयार ने 1612 ई0 में मैसूर राज्य की स्थापना की थी।
      • अरावीडु वंश का अंतिम शासक रंग-III था।

      Sunday, May 6, 2018

      May 06, 2018

      औरंगजेब का जीवन परिचय ।


      • औरंगजेब का जन्म 3 नवम्बर 1618 ई0 को उज्जैन के दोहाद नामक स्थान पर हुआ ।
      • औरंगजेब के बचपन का अधिकांश समय नूरजहाँ के पास बीता । 
      • औरंगजेब का विवाह 18 मई, 1637 ई0 को फारस के राजघराने की 'दिलरास बानो बेगम के साथ हुआ । 
      • औरंगजेब अपना राज्याभिषेक अबुल मुजफ्फर मुहउद्दीन मुजफ्फर औरंगजेब बहादुर आलमगीर की उपाधि से 31 जुलाई, 1658 ई0 को करवाया । 
      • औरंगजेब अपना राज्याभिषेक दोबारा शाहजहाँ के शानदार महल में जुन, 1659 ई0 को करवाया । 
      • औरंगजेब के गुरु मीर मुहम्मद हकीम थे । 
      • औरंगजेब सुन्नी धर्म  को मानता था, उसे जिंदा पीर कहा जाताा  था । 
      • औरंगजेब ने इस्लाम नहीं स्वीकार करने के कारण सिक्खों के 9वें  गुरु तेगबहादुर की हत्या करवा दी ।

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      May 06, 2018

      शाहजहाँ का जीवन परिचय ।


      • शाहजहाँ का जन्म 5 जनवरी , 1592 ई0 को लाहौर में हुआ । 
      • शाहजहाँ की माता जगत गोसाई जोधपुर के शासक मोटा राजा उदय सिंह की पुत्री थी ।
      • शाहजहाँ के बचपन का नाम खुर्रम था ।
      • अहमदनगर के वजीर मलिक अम्बर के विरुद्ध सफलता से खुश होकर जहाँगीर ने खुर्रम को शाहजहाँ की उपाधि प्रदान की थी ।
      • 1612 ई0 में शाहजहाँ का विवाह आसफँ खाँ की पुत्री अरजुमंद बानो बेगम से हुआ जिसे शाहजहाँ ने मलिका-ए-जमानि की उपाधि दी थी । 1631 ई0 में प्रसव पीड़ा के कारण उसकी मृत्य हो गई । 
      • 24 फरवरी , 1628 ई0 को शाहजहाँ आगरे में अबुल मुजफ्फर शहाबुद्दीन मुहम्मद साहिब किरन-ए-सानी की उपाधि प्राप्त कर सिंहासन पर बैठा । 
      • शाहजहाँ ने आसफँ खाँ को वजीर का पद दिया था ।
      • शाहजहाँ ने नूरजहाँ को दो लाख रुपए प्रति वर्ष पेंशन देकर लाहौर भेज दिया जहाँ 1645 ई0 में उसकी मृत्यु हो गयी । 
      • अपनी बेगम मुमताज महल के याद में शाहजहाँ  ने विश्व प्रसिद्ध ताजमहल का निर्माण उसकी कब्र के उपर करवाया । 
      • ताजमहल का निर्माण करनेवाला मुख्य स्थापत्य कलाकार उस्ताद अहमद लाहौरी था । 


      Rashtrakuta Dynasty in Hindi
      Second World War in Hindi


      • मयूर सिंहासन का निर्माण शाहजहाँ ने करवाया था । इसका मुख्य कलाकार बे बादल खाँ था। 
      • शाहजहाँ द्वारा बनवायी गयी प्रमुख इमारतें हैं । - दिल्ली का लालकिला, दीवाने खास, दीवाने आम, दिल्ली जामा मस्जिद, आगरा मोती मस्जिद, ताजमहल आदि । 
      • शाहजहाँ के शासनकाल को स्थापत्य कला का स्वर्ण काल कहा जाता है । 
      • शाहजहाँ ने 1638 ई0 में अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली लाने के लिए यमुना नदी के किनारे शाहजहाँबाद की नींव डाली । 
      • शाहजहाँ के पुत्र में दाराशिकोह सर्वाधिक विद्वान था । इसने भगवद् गीता, योगवशिषठ, उपनिषद् एवं रामायण का अनुवाद फारसी में करवाया ।
      • शाहजहाँ के पुत्रों के बीच उत्तराधिकार का युद्ध 1657 ई0 में शुरु हुआ । 
      • उत्तराधिकार का अंतिम युद्ध देवराई की घाटी में 12 से 14 अप्रैल, 1659 ई0 को औरंगजेब और दारा शिकोह के बीच हुआ । जिसमे औरंगजेब की जीत हुई ।
      • 18 जून, 1658 ई0 को औरंगजेब ने शाहजहाँ  को बंदी बना लिया । 
      • आगरे के किले में अपने कैदी जीवन के आठवें वर्ष अर्थात 31 जनवरी, 1666 ई0 को 74 वर्ष की अवस्था में शाहजहाँ को मृत्यु हो गयी । 

      Saturday, May 5, 2018

      May 05, 2018

      जहाँगीर का जीवन परिचय ।


      • जहाँगीर का जन्म 30 अगस्त , 1569 ई0 को हुआ था।
      • अकबर ने अपने पुत्र का नाम सलीम सुफी संत शेख सलीम चिश्ती के नाम पर रखा । 
      • जहाँगीर का राज्याभिषेक 3 नवम्बर, 1605 ई0 को हुआ, वह नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर बादशाही गाजी की उपाधि धारण कर गद्दी पर बैठा । 
      • जहाँगीर के काल को चित्रकला का स्वर्णकाल कहा जाता है ।
      • जहाँगीर ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि   "कोई भी चित्र चाहे वह किसी मृतक व्यक्ति या जीवित  व्यक्ति द्वारा बनाया गया हो, मैं देखते ही तुरंत बता सकता हुँ कि यह किस चित्रकार की कृति है ।"
      • जहाँगीर ने अपनी आत्मकथा में यह भी लिखा की  "यदि किसी चेहरे पर आँख किसी एक चित्रकार ने और भौंह किसी और ने बनाई हो , तो भी जान लेता हूँ कि आँख किसने और भौंह किसने बनाई हैं । "

      • जहाँगीर के सबसे बड़े पुत्र खुसरो ने 1606 ई0 में अपने पिता के विरुद्ध विद्रोह कर दिया । खुसरो और जहाँगीर की सेना के बीच युद्ध जालंधर के निकट भैरावल नामक मैदान में हुआ । खुसरो युद्ध हार गया और उसे पकड़कर कैद में डाल दिया । 
      • खुसरो की मदद करने के कारण जहाँगीर ने सिक्खों के 5वें गुरु अर्जुनदेव को फांसी दिलवा दी ।
      • अहमदनगर के वजीर मलिक अम्बर के विरुद्ध सफलता से खुश होकर जहाँगीर ने खुर्रम को शाहजहाँ की उपाधि प्रदान की । 
      • जहाँगीर के पांच पुत्र थे  खुसरो, परवेज, खुर्रम, शहरयार, जहाँदार । 
      • जहाँगीर ने मेहरुनिसा से 1611 ई0 में विवाह कर लिया । विवाह के बाद जहाँगीर ने मेहरुनिसा को नूरजहाँ की उपाधि प्रदान की ।
      • जहाँगीर के शासनकाल में कैप्टन हाँकिंस, सर टाॅमस रो, विलियम फिंच, और एडवर्ड पैरी जैसे यूरोपीय यात्री आए थे । 
      • जहाँगीर की 7 नवम्बर, 1627 ई0 को भीमवार नामक स्थान पर हो गयी । 
      • जहाँगीर के शव शहादता  (लाहौर) में रावी नदी के किनारे दफनाया गया । 
      • जहाँगीर के मकबरे का निर्माण नूरजहाँ ने करवाया था । 

      Friday, May 4, 2018

      May 04, 2018

      अकबर का जीवन परिचय ।


      • सम्राट अकबर का जन्म 15 अक्टूबर, 1542 ईसा को हमिदा बानु बेगम के गर्भ से अमरकोट के राणा वीर साल के महल में हुआ । 
      • अकबर का राज्याभिषेक 14 फरवरी, 1556 ईसा को पंजाब के कलानौर नामक स्थान पर हुआ था । 
      • वह जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर वाहवाही गाजी की उपाधि से राजसिंहासन पर बैठा । 
      • अकबर का शिक्षक अब्दुल लतीफ ईरान का विद्वान था।
      • बैरम खाँ 1556 से 1560 ईसा तक अकबर का संरक्षक रहा । 
      • मक्का की तीर्थ-यात्रा के दौरान पाटन नामक स्थान पर मुबारक खाँ नामक युवक ने बैरम खाँ की हत्या कर दी थी । 
      • पानीपत की दूसरी लड़ाई 5 नवंबर, 1556 ई0 अकबर और हेमू के बीच हुई जिसमें अकबर की जीत हुई थी । 
      • हलदीघाटी की लड़ाई 15 जुन, 1576 ई0 को अकबर और महाराणा प्रताप के बीच हुई जिसमें भी अकबर की जीत हुई । 
      • अकबर का सेनापति मान सिंह था । 
      • हलदीघाटी की लड़ाई में नेतृत्व मान सिंह और आसफ खाँ ने किया था । 




      • दीन-ए-इलाही धर्म का प्रधान पुरोहित अकबर था । 
      • दीन-ए-इलाही धर्म स्वीकार करने वाला प्रथम और अन्तिम हिन्दू शासक बीरबल था । 
      • बीरबल के बचपन का नाम महेश दास था ।
      • अकबर ने जैन धर्म के जैन आचार्य हरिविजय सूरी को जगतगुरु की उपाधि दी थी ।
      •  अकबर के दरबार का प्रसिद्ध संगीतकार तानसेन था ।
      •  संगीत सम्राट तानसेन का जन्म ग्वालियर में हुआ था । अकबर ने उन्हे कण्ठाभरण वाणीविलास की उपाधि दी थी । 
      •  अकबर के शासनकाल के प्रमुख गायक तानसेन , बाजबहादुर , बाबा रामदास एवं बैजू बाबरे थे । 
      • अकबर  के दरबार का प्रसिद्ध चित्रकार अब्दुससमद था।
      • अकबर के शासनकाल के अन्य चित्रकार दसवंत एवं बसावन थे । 
      • अकबर के दरबार को सुशोभित करने वाले नौ रत्न इस तरह थे ।    बीरबल,  अबुलफजल ,टोडरमल, भगवानदास, तानसेन, मान सिंह,  अब्दुॅरहीम खानखाना , मुल्ला दो प्याजे,  हकिम हुकार ।
      • अबुलफजल का बड़ा भाई फैजी राजकवि के पद पर आसीन था । 




      • अकबर ने गुजरात विजय के उपलक्ष्य में बुलंद दरवाजा का निर्माण करवाया था ।
      • अकबर ने दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा का निर्माण करवाया, आगरा में लाल किला , फतेहपुर सिकरी में शाहीमहल, दिवाने खास, पंचमहल, जोधाबाई का महल , इबादत खाना ।
      •  अकबर ने इलाहाबाद का किला और लाहौर का किला का भी निर्माण करवाया है । 
      • प्रसिद्ध सुफी संत सलिम चिश्ती अकबर का समकालीन था । 
      • अबुलफजल ने अकबरनामा ग्रन्थ की रचना की थी । 
      • अकबर की मृत्यु के बाद उसके शव को सिकंदराबाद के निकट दफनाया गया हैं । 

      Thursday, May 3, 2018

      May 03, 2018

      हुमायूँ का जीवन परिचय ।



      • नसीरुद्दीन हुमायूँ  29 दिसम्बर को आगरा में 23 वर्ष की अवस्था में सिंहासन पर बैठा ।
      • दिल्ली की गद्दी पर बैठने से पहले हुमायूँ  बदखशाँ का सूबेदार था ।
      • अपने पिता के निर्देश के अनुसार हुमायूँ ने अपने राज्य का बँटवारा अपने भाइयों में कर दिया । इसने कामरान को काबुल और कंधार,  असकरी को सँभल,  हिंदाल को अलवर और मेवाड़ की जागीर दी । 
      • 1533 ईसा में  'दीनपनाह' नामक नगर की स्थापना की थी ।
      • हुमायूँ  25 जुन , 1539 ईसा को शेर खाँ से चौसा का युद्ध लडा जिसमे शेर खाँ  विजयी रहा । इस युद्ध के बाद शेर खाँ ने 'शेरशाह' की पदवी ग्रहण की ।
      • कन्नौज का युद्ध 17 मई 1540 ईसा में शेर खाँ एवं हुमायूँ के बीच हुआ । इस युद्ध मे भी हुमायूँ पराजित हुआ । शेर खाँ  ने आगरा और दिल्ली पर कब्जा कर लिया । 
      • कन्नौज के युद्ध के बाद हुमायूँ सिंध चला गया, जहाँ उसने 15 वर्ष घुमक्कड़ो जैसा निर्वासित  व्यतीत किया । 
      • निर्वासन के समय हुमायूँ ने हिंदाल के आध्यात्मिक गुरु फारसवासी शिया मीर बाबा दोस्त उर्फ मीर अली अकबर जामी के पुत्री  हमिदा बानूू बेेेगम से 29 अगस्त, 1541 ईसा को विवाह कर लिया । कालांतर मेें हमिदा से अकबर जैसा महान सम्राट का जन्म हुुआ । 
      • 1555 ईसा में हुमायूँ ने पंजाब के शूरी शासक सिकंदर को पराजित कर पुन: दिल्ली पर कब्जा कर लिया ।
      • 1 जनवरी, 1556 ईसा को दीन पनाह के भवन में स्थित पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरने के कारण हुमायूँ की मृत्यु हो गयी । 
      • हुमायूँनामा की रचना  गुल-बदन बेगम ने की थी । 
      • हुमायूँ ज्योतिष में विश्वास करता था, इसलिए इसने सप्ताह के सातों दिन सात रंग के कपड़े पहनने के नियम बनाए  । 

      Wednesday, May 2, 2018

      May 02, 2018

      बाबर का जीवन परिचय ।

             
                    मुगल वंश का संस्थापक बाबर था । बाबर एंव उत्तरवर्ती मुगल शासक तुर्क एंव सुन्नी मुसलमान थे ।
      बाबर ने मुगल वंश की स्थापना के साथ ही पद-पादशाही की स्थापना की, जिसके तहत शासक को बादशाह कहा जाता था ।

      बाबर  (1483 - 1530 ईसा)

      1) बाबर का जन्म 24 फरवरी, 1483 ईसा में हुआ था।
      2) बाबर के पिता का नाम उमरशेख मिर्जा था ।
      3) उमरशेख मिर्जा फरगाना नामक छोटे राज्य के
          शासक थे ।
      4) बाबर फरगाना का शासक 8 जून , 1494 ईसा को
          बना ।
      5) बाबर ने 1507 ई में बादशाह की उपाधि धारण की ,      जिसे अब तक कोई तैमूर शासक ने धारण नहीं            किया था।


      6) बाबर के चार पुत्र थे ।  हुमायूं , कामरान, असकरी ,      तथा हिंदाल ।
      7) बाबर ने भारत पर पांच बार आक्रमण किया ।
      8) बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए पंजाब        के शासक दौलत खान लोदी एवं मेवाड़ के शासक        राणा साँगा ने  निमंत्रण दिया था ।
      9) पानीपत का प्रथम युध्द  21 अप्रैल, 1526 ईसा          को इब्राहिम लोदी एवं बाबर के बीच हुई । जिसमें          बाबर विजयी हुआ ।


      10) उस्ताद अली एवं मुस्तफा  बाबर के दो प्रसिद्ध              निशानेबाज थे , जिसने पानीपत के प्रथम युध्द में          भाग लिया था ।
      11) बाबर को अपनी उदारता के लिए 'कलंदर' की              उपाधि दी गई थी ।
      12) खानवा युध्द में विजय के बाद बाबर ने 'गाजी' की         उपाधि धारण की थी ।
      13) करीब 48 वर्ष की आयु में 27 दिसम्बर, 1530            ईसा को आगरा में बाबर की मृत्यु हो गयी ।
            प्रारंभ में बाबर के शव को आगरा के आरामबाग में        दफनाया गया , बाद में काबुल में उसके द्वारा चुने          हुए स्थान पर दफनाया गया ।
      14) बाबर ने अपनी आत्मकथा 'बाबरनामा' की रचना          की थी , जिसका अनुवाद बाद में फारसी भाषा में          अब्दुल रहीम खानखाना ने किया ।
      15) बाबर प्रसिद्ध नकशबंदी सूफी ख्वाजा उबैदुलला           अहरार का अनुयायी था ।
      16) बाबर की मृत्यु के बाद हुमायूं उसका उत्तराधिकारी         बना ।