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Friday, August 17, 2018

August 17, 2018

लोदी वंश


       लोदी वंश (1451- 1526 ई0)


   राजधानी:      दिल्ली,आगरा 
   भाषा:           फारसी 
   धर्म:             सुन्नी इस्लाम 
   शासन:         सल्तनत 

   पहला सुल्तान:      बहलोल लोदी 
   अंतिम सुल्तान:      इब्राहिम लोदी


                 लोदी वंश की स्थापना बहलोल लोदी ने 1451 ई0 में की थी। लोदीयों को अफगान नस्ल की एक जाती मानी हैं। अनेकों समस्याओं केे बावजूद बहलोल लोदी अपने साम्राज्य का विस्तार करने मेें सफल रहा। जौनपुर का शर्की सुल्तान उसका सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी था। लोदी वंश का वह योग्य शासक माना जाता हैं। सिकंदर लोदी ने आगरा को अपनी राजधानी बनाई थी। बिहार को अपने राज्य मेें मिलाना सिकंदर लोदी की बड़ी सफलता थी। इब्राहिम लोदी लोदी वंश अथवा दिल्ली सल्तनत का अंतिम सुल्तान था।


  ➢  लोदी वंश के बारे महत्वपूर्ण बिंदू:

  • लोदी वंश का संस्थापक बहलोल लोदी था।
  • 19 अप्रैल, 1451 ई0 को 'बहलोल शाहगाजी' की उपाधी से दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
  • दिल्ली पर प्रथम अफगान राज्य की स्थापना का श्रेय बहलोल लोदी को दिया जाता हैं।
  • बहलोल लोदी ने बहलोल सिक्के की शुरुआत की थी।
  • वह अपने सरदारों को मकसदे-ए-अली कहकर पुकारता था।
  • वह अपने सरदारों के खड़े रहने पर स्वयं भी खड़ा रहता था।
  • बहलोल लोदी का पुत्र निजाम खाँ 17 जुलाई, 1489 ई0 को 'सुल्तान सिकंदर शाह' की उपाधि से दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
  • सिकंदर लोदी ने ही आगरा शहर की स्थापना की।
  • इसने आगरा को अपनी राजधानी बनाया।
  • भूमि मापने के लिए प्रामाणिक पैमाना गजे सिकंदरी की शुरुआत सिकंदर लोदी ने की थी।
  • 'गुलरुखी' शीर्षक से फारसी कविताएँ लिखने वाला सुल्तान सिकंदर लोदी था।
  • इसके आदेश पर संस्कृत के एक आयुर्वेद ग्रंथ का फारसी में फरहंगे सिकंदरी के नाम से अनुवाद हुआ।
  • इसने नगरकोट के ज्वालामुखी मंदिर की मुर्ति को तोड़कर उसके टुकड़ों को कसाइयों को मांस तौलने के लिए दे दिया था।
  • इसने मुसलमानों को ताजिया निकालने एवं मुस्लिम स्त्रियों को पीरों और संतों के मजार पर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
  • मोठ की मस्जिद का निर्माण सिकंदर लोदी के वजीर के द्वारा करवाया गया था।
  • गले की बीमारी के कारण सिकंदर लोदी की 21 नवम्बर, 1517 ई0 को हो गयी। इसी दिन इसका पुत्र 'इब्राहिम शाह' की उपाधि से आगरा के सिंहासन पर बैठा।
  • 21 अप्रैल, 1526 ई0 को पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी बाबर से हार गया। वह इस युद्ध में मारा गया।
  • बाबर को भारत पर आक्रमण के लिए निमंत्रण पंजाब के शासक दौलत खाँ लोदी और इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खाँ ने दिया था।

नोट: सैय्यद वंश ने 1414-1451 ई0 तक दिल्ली              पर शासन किया था।

➢  सैय्यद वंश के बारे कुछ जानकारियां।
  • सैय्यद वंश का संस्थापक ख्रिज खाँ था। ख्रिज खाँ तैमूरलंग का सेनापति था। 
  • भारत पर आक्रमण कर लौटते समय तैमूरलंग ने ख्रिज खाँ को मुल्तान और लाहौर का शासक नियुक्त किया था।
  • ख्रिज खाँ तैमूरलंग के पुत्र शाहरुख को नियमित रूप से कर भेजा  था।
  • इसकी म्रत्यु 20 मई, 1421 ई0 में हो गयी।
  • ख्रिज खाँ के बाद उसका पुत्र मुबारक शाह शासक बना। इसने यमुना के किनारे मुबारकाबाद की स्थापना की थी।
  • सैय्यद वंश का अंतिम सुल्तान अलाउद्दीन आलम शाह था।
  • सैय्यद वंश का शासन करीब 37 वर्षों तक रहा।

➢ चुकिं सैय्यद वंश और लोदी वंश भी दिल्ली             सल्तनत का भाग है इसलिए दिल्ली सल्तनत           के बारें में कुुुुछ महत्वपूर्ण बातें जान ले।

        दिल्ली सल्तनत (1206 -1526 ई0) 


        राजधानी:       लाहौर (1206 -1210 ई0)
                              बदांयू  (1210 -1214 ई0)
                              दिल्ली (1214 -1327 ई0)
                              दौलताबाद (1327 -1334 ई0)
                              दिल्ली   (1334 -1506 ई0)
                             आगरा  (1506 -1526 ई0)

        भाषा:               फारसी
                                हिंदवी 
        धर्म:                  सुन्नी इस्लाम 
        शासन:              सल्तनत 

    प्रथम सुल्तान:    कुतुबुद्दीन ऐबक
    अंतिम सुल्तान:   इब्राहिम लोदी

     स्थापना:    जून, 1206 ई0
     अंत:          पानीपत का प्रथम युद्ध  (अप्रैल,                             1526 ई0)

     ➢  दिल्ली सल्तनत के बारे महत्वपूर्ण बिंदु


    • 1206 ई0 से 1526 ई0 तक भारत में दिल्ली सल्तनत के पाँच राजवंशों ने शासन किया। इन पाँच राजवंशों के शासनकाल को सल्तनतकाल कहा जाता हैं। यह पाँच राजवंशों निम्न हैं।
    1. गुलाम वंश  (1206 -1290 ई0) 
    2. खिलजी वंश  (1290 -1320 ई0)
    3. तुगलक वंश  (1320 -1398 ई0)
    4. सैयद वंश  (1414 -1451 ई0)
    5. लोदी वंश  (1451 -1526 ई0)

    • तुर्क आक्रमणकारियों द्वारा शासन किए हुए राज्य को ही दिल्ली सल्तनत कहा जाता हैं। 
    • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में सुल्तान राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था।
    • सुल्तान स्वयं को अल्लाह का प्रतिनिधि मानता था। कुरान के नियमों के अनुसार शासन चलाता था।
    • सुल्तान को शासन-कार्य में सहायता देने के लिए मंत्रिपरिषद होती थी।
    • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में चार प्रकार के कर किए जाते थे, खम्स, खराज, जकात और जजिया (सिर्फ हिन्दुओं से)
    • साम्राज्य प्रांतो में बंटे होते थे। प्रत्येक प्रांतो का शासक सूबेदार होता था।
    • प्रधानमंत्री को वजीर कहा जाता था।

    Thursday, August 16, 2018

    August 16, 2018

    तुगलक वंश

                         

            तुगलक वंश (1320- 1398 ई0)


        राजधानी:                   दिल्ली 
        भाषा:                        फारसी 
        धर्म:                           सुन्नी इस्लाम 
        शासन:                       सल्तनत 


        प्रथम सुल्तान:         गयासुद्दीन तुगलक
       अंतिम सुल्तान:        नासिरुद्दीन महमूद


               तुगलक वंश दिल्ली सल्तनत का एक राजवंश था। गयासुद्दीन तुगलक ने इस वंश की स्थापना की थी। तुगलक वंश को तुर्क नस्ल की एक जाति मानी जाती हैं।
    गयासुद्दीन तुगलक, मुहम्मद बिन तुगलक और फिरोज तुगलक इस वंश के योग्य शासक थे। मुहम्मद बिन तुगलक केे शासनकाल में दक्षिण भारत में विजयनगर और बहमनी नाम के दो स्वतंत्र राज्य की स्थापना हुई थी। अफ्रीक यात्री इब्नबतूता इस शासनकाल में भारत आया था। तैमूरलंग का आक्रमण और उत्तराधिकार का अभाव इस वंश के समाप्त होने केे कारण माने जाते हैैं। इस वंश ने 1320- 1398 ई0 तक शासन किया।


     ➢   तुगलक युग के बारे महत्त्वपूर्ण बातें:
    • गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलक वंश की स्थापना की थी।
    • गाजी मलिक 5 सितम्बर, 1320 ई0 को खिलजी वंश के खुशरों खाँ को पराजित कर गयासुद्दीन तुगलक के नाम से 8 सितम्बर, 1320 ई0 को दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
    • गयासुद्दीन तुगलक ने करीब 29 बार मंगोल आक्रमण को विफल किया था।
    • गयासुद्दीन तुगलक ने दिल्ली के समीप स्थित पहाड़ियों पर तुगलकाबाद नाम का एक नया नगर स्थापित किया। रोमन शैली में निर्मित इस नगर में एक दुर्ग का निर्माण भी हुआ था। इस दुर्ग को छप्पनकोट के नाम से भी जाना जाता हैं।
    • इसने सिंचाई के लिए कुएँ एवं नहरों का निर्माण करवाया। सम्भवतः नहरों का निर्माण करने वाला गयासुद्दीन तुगलक प्रथम शासक था।
    • गयासुद्दीन तुगलक की म्रत्यु 1325 ई0 में बंगाल के अभियान से लौटते समय जूना खाँ द्वारा निर्मित लकड़ी के महल में दबकर हो गयी थी।


    • गयासुद्दीन तुगलक के बाद जूना खाँ मुहम्मद बिन तुगलक के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा।
    • मध्यकाल के सभी सुल्तानों में मुहम्मद बिन तुगलक सर्वाधिक शिक्षित, विद्वान एवं योग्य व्यक्ति था।
    • मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा किए गए चार योजनाएँ निम्न थी-
    1. राजधानी- परिवर्तन।
    2. सांकेतिक मुद्रा की शुरुआत।
    3. दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि।
    4. खुरासन एवं कराचिल का अभियान।
    • मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि के विकास के लिए 'अमिर-ए-कोही' नामक एक नवीन विभाग की स्थापना की।
    • मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरी लाया और इसका नाम दौलताबाद रखा।
    • अफ्रीकी यात्री इब्नबतूता लगभग 1333 ई0 में भारत आया था। सुल्तान ने इसे काजी नियुक्त करवाया और 1342 ई0 मेें इसे अपने राजदूत के रूप में चीन भेजा।
    • इब्नबतूता की पुस्तक रेहला में मुहम्मद बिन तुगलक के समय की घटनाओं का वर्णन है।
    • मुहम्मद बिन तुगलक शेख अलाउद्दीन का शिष्य था। वह सल्तनत का पहला शासक था, जो अजमेर में शेख मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और बहराइच में सालार मसूद गाजी के मकबरे में गया था।
    • मुहम्मद बिन तुगलक ने बदायूँ में मीरन मुलहीम, दिल्ली में शेख निजामुद्दीन औलिया, मुल्तान में शेख रुकनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और अजुधन में शेख मुल्तान आदि संतों की कब्र पर मकबरे बनवाए।
    • मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दक्षिण में हरिहर एवं बुक्का नामक दो भाइयों ने 1336 ई0 में स्वतंत्र राज्य विजयनगर की स्थापना की।
    • महाराष्ट्र में अलाउद्दीन बहमन शाह ने 1347 ई0 में स्वतंत्र बहमनी राज्य की स्थापना की।
    • मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु 20 मार्च, 1351 ई0 को सिंध जाते समय थट्ठा के निकट गोडाल में हो गयी थी।

    • मुहम्मद बिन तुगलक के बाद फिरोज तुगलक सुल्तान बना। इसका राज्याभिषेक थट्ठा के नजदीक 20 मार्च, 1351 ई0 को हुआ। पुनः फिरोज तुगलक का राज्याभिषेक दिल्ली में अगस्त 1351 ई0 को हुआ। खलीफा ने इसे कासिम अमिर उल मोममीन की उपाधि दी।
    •  फिरोज तुगलक ने 5 बड़ी नहरों कि निर्माण करवाया था।
    • फिरोज तुगलक ने 300 नये नगरों की स्थापना की। इनमें हिसार, फिरोजपुर, फतेहाबाद, जौनपुर, फिरोजाबाद (दिल्ली) आदि प्रमुख हैं।
    • इसके शासनकाल में ख्रिजाबाद (टोपरा गाँव) और मेरठ से अशोक के दो स्तम्भों को लाकर दिल्ली में स्थापित किया गया।
    • सुल्तान फिरोज तुगलक ने अनाथ मुस्लिम महिलाओं, विधवाओं, और लड़कियों की सहायता के लिए एक नए विभाग दीवान-ए-खैरात की स्थापना की।
    • सल्तनतकालीन सुल्तानों के शासनकाल में सबसे अधिक दासों की संख्या (करीब - 1,80,000) फिरोज तुगलक के समय थी।
    • फिरोज तुगलक ने सैन्य पदों को वंशानुगत बना दिया।
    • फिरोज तुगलक ने अपनी आत्मकथा फतूहात-ए-फिरोजशाही की रचना की।
    • इसने ज्वालामुखी मंदिर के पुस्तकालय से लुटे गए 1300 ग्रंथों में से कुछ को फारसी में विद्वान अपाउद्दीन द्वारा दलायते-फिरोजशाही नाम से अनुवाद करवाया।
    • फिरोज तुगलक ने दिल्ली में कोटला फिरोजशाह दुर्ग का निर्माण करवाया।
    • फिरोज काल में निर्मित खान-ए-जहाँ तेलंगानी के मकबरे की तुलना जेरुसलम में निर्मित उमर के मस्जिद से की जाती हैं।
    • फिरोज तुगलक की मृत्यु सितम्बर, 1388 ई0 में हो गयी।
    • तुगलक वंश का अंतिम शासक नासिरुद्दीन महमूद तुगलक था। इसका शासन दिल्ली से पालम तक ही रह गया था।
    • तैमूरलंग ने सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद के समय में दिल्ली पर 1398 ई0 में आक्रमण किया था।


    चुकिं तुगलक वंश दिल्ली सल्तनत का ही भाग         है इसलिए दिल्ली सल्तनत के बारें में कुुुुछ               महत्वपूर्ण बातें जान ले।

        दिल्ली सल्तनत (1206 -1526 ई0) 


        राजधानी:       लाहौर (1206 -1210 ई0)
                              बदांयू  (1210 -1214 ई0)
                              दिल्ली (1214 -1327 ई0)
                              दौलताबाद (1327 -1334 ई0)
                              दिल्ली   (1334 -1506 ई0)
                             आगरा  (1506 -1526 ई0)

        भाषा:               फारसी
                                हिंदवी 
        धर्म:                  सुन्नी इस्लाम 
        शासन:              सल्तनत 

        प्रथम सुल्तान:    कुतुबुद्दीन ऐबक
        अंतिम सुल्तान:   इब्राहिम लोदी

        स्थापना:        जून, 1206 ई0
       अंत:              पानीपत का प्रथम युद्ध  (अप्रैल,                             1526 ई0)

     ➢  दिल्ली सल्तनत के बारे महत्वपूर्ण बिंदु


    • 1206 ई0 से 1526 ई0 तक भारत में दिल्ली सल्तनत के पाँच राजवंशों ने शासन किया। इन पाँच राजवंशों के शासनकाल को सल्तनतकाल कहा जाता हैं। यह पाँच राजवंशों निम्न हैं।
    1. गुलाम वंश  (1206 -1290 ई0) 
    2. खिलजी वंश  (1290 -1320 ई0)
    3. तुगलक वंश  (1320 -1398 ई0)
    4. सैयद वंश  (1414 -1451 ई0)
    5. लोदी वंश  (1451 -1526 ई0)

    • तुर्क आक्रमणकारियों द्वारा शासन किए हुए राज्य को ही दिल्ली सल्तनत कहा जाता हैं। 
    • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में सुल्तान राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था।
    • सुल्तान स्वयं को अल्लाह का प्रतिनिधि मानता था। कुरान के नियमों के अनुसार शासन चलाता था।
    • सुल्तान को शासन-कार्य में सहायता देने के लिए मंत्रिपरिषद होती थी।
    • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में चार प्रकार के कर किए जाते थे, खम्स, खराज, जकात और जजिया (सिर्फ हिन्दुओं से)
    • साम्राज्य प्रांतो में बंटे होते थे। प्रत्येक प्रांतो का शासक सूबेदार होता था।
    • प्रधानमंत्री को वजीर कहा जाता था।

    Wednesday, August 15, 2018

    August 15, 2018

    खिलजी वंश



                              खिलजी वंश

        राजधानी:                   दिल्ली 
        भाषा:                         फारसी 
        धर्म:                           सुन्नी इस्लाम 
        शासन:                       सल्तनत 


        प्रथम सुल्तान:         जलालुद्दीन फिरोज खिलजी
       अंतिम सुल्तान:        कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी


                     खिलजी वंश या ख़लजी वंश मध्यकालीन भारत का एक राजवंश था। यह दिल्ली सल्तनत का गुलाम वंश के बाद दूसरा वंश था। इस वंश की स्थापना जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने 1290 ई0 को गुलाम वंश के अंतिम शासक शम्मुद्दीन कैमुर्स के पतन के बाद की थी। खिलजी मूलतः कहाँ के थे इसपर इतिहासकारों में मतभेद है कितुुं अधिक इतिहासकारों ने खिलजीयों को तुर्क माना है। इस वंश का सबसे योग्य शासक अलाउद्दीन खिलजी था। अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली का प्रथम मुस्लिम शासक था जो दक्षिण भारत पर विजय पायी। दक्षिण भारत पर विजय प्राप्त करते समय मलिक काफूर उसका सेेनापति था। खिलजी युग को मुस्लिम शक्ति के विस्तार का युुुग भी कहा जाता हैं। खिलजीयों के शासन के समय मंगोलों का भी आक्रमण हुआ किंतु उन्हे सफलता प्राप्त नहीं हुई। इस वंश ने 1290 ई0 से 1320 ई0 तक शासन किया।

     ➢   खिलजी वंश के बारें में महत्वपूर्ण तथ्य:

    •  जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने गुलाम वंश के शासन को समाप्त कर 13 जून, 1290 ई0 को खिलजी वंश की स्थापना की।
    • इसने किलोखरी को अपनी राजधानी बनाया।
    • जलालुद्दीन फिरोज खिलजी की हत्या उसके दामाद एवं भतीजा अलाउद्दीन खिलजी ने कड़ामानिकपुर (इलाहाबाद) में कर दी।
    • 22 अक्टूबर, 1296 ई0 को अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली का सुल्तान बना।
    • अलाउद्दीन खिलजी के बचपन का नाम अली तथा गुरशास्प था।
    • अलाउद्दीन खिलजी ने सेना को नकद वेतन देने एवं स्थायी सेना रखने जैसों चीजों की शुरुआत की थी।
    • अलाउद्दीन खिलजी ने ही घोड़ा दागने और सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा की शुरुआत भी की थी।
    • अलाउद्दीन ने खस्म  (लूट का धन) में सुल्तान का हिस्सा 1/4 भाग के स्थान पर 3/4 भाग कर दिया।
    • इसने व्यापारियों में बेईमानी रोकने के लिए कम तौलने वाले व्यक्ती के शरीर से मांस काट लेने का आदेश दिया।
    • अलाउद्दीन खिलजी अपनी बाजार व्यवस्था के लिए इतिहास में प्रसिद्ध हैं।
    • दक्षिण भारत की विजय के लिए अलाउद्दीन ने मलिक काफूर को भेजा था। 
    • दक्षिण भारत पर जीत प्राप्त करना अलाउद्दीन खिलजी की बड़ी सफलता मानी जाती हैं।
    • जमैयत खाना मस्जिद, अलाई दरवाजा, सीरी का किला, और हजार खम्भा महल का निर्माण अलाउद्दीन खिलजी ने करवाया था।
    • अलाउद्दीन खिलजी ने स्वयं को सिकंदर-ए-सानी की उपाधि से नवाजा।
    • अमिर खुसरो अलाउद्दीन के दरबारी कवि थे। अमिर खुसरो को सितार और तबले के आविष्कार का श्रेय भी दिया जाता है।
    • अमिर खुसरो का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा में हुआ था। इन्हे तुतिए हिंद (भारत का तोता) के नाम से भी जाना जाता हैं।
    • अलाउद्दीन खिलजी की मृत्य 5 जनवरी, 1316 ई0 को हो गयी थी।

    • कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी 1316 ई0 को दिल्ली के सिंहासन पर बैठा। इसे नग्न स्त्री, पुरुष की संगत पसंद थी।
    • मुबारक खिलजी कभी-कभी राजदरबार में स्त्रियों का वस्त्र पहनकर आ जाता था।
    • बरनी के अनुसार मुबारक खिलजी कभी-कभी नग्न होकर दरबारियों के बीच दौड़ा करता था।
    • मुबारक खाँ ने खलीफा की उपाधि धारण की थी।
    • मुबारक के वजीर खुशरों खाँ ने 15 अप्रैल, 1320 ई0 को इसकी हत्या कर दी और स्वयं दिल्ली के गद्दी पर बैठ गया।
    • खुशरों खाँ ने पैगंबर के सेनापति की उपाधि धारण की।

     ➢  चुकिं खिलजी वंश दिल्ली सल्तनत का ही               भाग है इसलिए दिल्ली सल्तनत के बारें में               कुुुुछ महत्वपूर्ण बातें जान ले।

         दिल्ली सल्तनत (1206 -1526 ई0) 


        राजधानी:       लाहौर (1206 -1210 ई0)
                              बदांयू  (1210 -1214 ई0)
                              दिल्ली (1214 -1327 ई0)
                              दौलताबाद (1327 -1334 ई0)
                              दिल्ली   (1334 -1506 ई0)
                             आगरा  (1506 -1526 ई0)

        भाषा:               फारसी
                                हिंदवी 
        धर्म:                  सुन्नी इस्लाम 
        शासन:              सल्तनत 

        प्रथम सुल्तान:    कुतुबुद्दीन ऐबक
        अंतिम सुल्तान:   इब्राहिम लोदी

        स्थापना:        जून, 1206 ई0
       अंत:              पानीपत का प्रथम युद्ध  (अप्रैल,                             1526 ई0)

     ➢  दिल्ली सल्तनत के बारे महत्वपूर्ण बिंदु


    • 1206 ई0 से 1526 ई0 तक भारत में दिल्ली सल्तनत के पाँच राजवंशों ने शासन किया। इन पाँच राजवंशों के शासनकाल को सल्तनतकाल कहा जाता हैं। यह पाँच राजवंशों निम्न हैं।
    1. गुलाम वंश  (1206 -1290 ई0) 
    2. खिलजी वंश  (1290 -1320 ई0)
    3. तुगलक वंश  (1320 -1398 ई0)
    4. सैयद वंश  (1414 -1451 ई0)
    5. लोदी वंश  (1451 -1526 ई0)

    • तुर्क आक्रमणकारियों द्वारा शासन किए हुए राज्य को ही दिल्ली सल्तनत कहा जाता हैं। 
    • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में सुल्तान राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था।
    • सुल्तान स्वयं को अल्लाह का प्रतिनिधि मानता था। कुरान के नियमों के अनुसार शासन चलाता था।
    • सुल्तान को शासन-कार्य में सहायता देने के लिए मंत्रिपरिषद होती थी।
    • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में चार प्रकार के कर किए जाते थे, खम्स, खराज, जकात और जजिया (सिर्फ हिन्दुओं से)
    • साम्राज्य प्रांतो में बंटे होते थे। प्रत्येक प्रांतो का शासक सूबेदार होता था।
    • प्रधानमंत्री को वजीर कहा जाता था।




    Tuesday, August 14, 2018

    August 14, 2018

    गुलाम वंश

                       दिल्ली सल्तनत

        गुलाम वंश   (1206 ई0-1290 ई0)


        राजधानी:                     लाहौर,दिल्ली 
        भाषा:                          फारसी एवं तुर्क 
        धर्म:                             सुन्नी इस्लाम
        शासन :                        सल्तनत 

        प्रथम सुल्तान :              कुतुबुद्दीन ऐबक
       अतिंम सुल्तान :             शम्मुद्दीन कैमुर्स

                
           गुलाम वंश मध्यकालीन भारत का एक राजवंश था वैसे तो इस वंश के स्थांपक कुतुबुद्दीन ऐबक मुहम्मद गौरी का गुलाम था। तराईन की द्वितीय युद्ध में मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराकर दिल्ली पर कब्जा कर लिया, किन्तु वह जीते हुए प्रदेशों का शासन भार अपने गुलाम सेनानायक को सौंपकर गजनी चला गया।
    मुहम्मद गौरी की 1206 ई0 में म्रत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने स्वयं को दिल्ली का स्वतंत्र राजा घोषित कर गुलाम वंश की नीवं डाली। चुकी वह एक गुलाम था तो उसके वंश का नाम भी गुलाम वंश पड़ा। इस वंश ने 1206 ई0 से 1292 ई0 तक शासन किया।

     गुलाम वंश के बारे महत्वपूर्ण तथ्य :

    • गुलाम वंश की स्थापना 1206 ई0 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने किया था। वह मुहम्मद गौरी का गुलाम था।
    • कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपना राज्याभिषेक 24 जून, 1206 ई0 को करवाया था।
    • कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपनी राजधानी लाहौर में बनवायी थी।
    • दिल्ली का कुवत-उल-इस्लाम मस्जिद एंव अजमेर का ढाई दिन का झोंपड़ा नामक मस्जिद का निर्माण कुतुबुद्दीन ने करवाया था।
    • कुतुबुद्दीन ऐबक ने ही कुतुबमीनार की नींव डाली थी।
    • कुतुबुद्दीन ऐबक को लाख बख्श  (लाखों का दान देनेवाला) भी कहा जाता था।
    • प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने वाला ऐबक का सेनापति बख्तियार खिलजी था।
    • कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु 1210 ई0 में चौगान खेलते समय घोड़े से गिरकर हो गयी। इसे लाहौर में दफनाया गया।
    • ऐबक का उत्तराधिकारी आरामशाह हुआ जिसने सिर्फ आठ महिनों तक शासन किया।

    • आरामशाह की हत्या करके इल्तुतमिश 1211 ई0 में दिल्ली की गद्दी पर बैठ गया।
    • इल्तुतमिश तुर्कीस्तान का इल्बरी तुर्क था, जो ऐबक का गुलाम एंव दामाद था। ऐबक की मृत्यु के समय वह बदायूँ का गवर्नर था।
    • इल्तुतमिश ने अपनी राजधानी लाहौर से दिल्ली लायी।
    • इल्तुतमिश द्वारा किए गए महत्त्वपूर्ण कार्य निम्न हैं।
    1. कुतुबमीनार के निर्माण को पुरा करवाया।   
    2. सबसे पहले शुद्ध अरबी सिक्के जारी किए।
    3. इक्ता प्रणाली चलाई।
    4. सर्वप्रथम दिल्ली के अमीरों का दमन किया।
    5. चालीस गुलाम सरदारों का संगठन बनाया, जो तुर्कान-ए-चिहलगानी के नाम से जाना गया।

    • इल्तुतमिश पहला शासक था, जिसने 1229 ई0 में बगदाद के खलीफा से सुल्तान पद की वैधानिक स्वीकृति प्राप्त की।
    • इल्तुतमिश की म्रत्यु अप्रैल, 1236 ई0 में हो गयी।
    • इल्तुतमिश की म्रत्यु के बाद उसका पुत्र रुकनुद्दीन फिरोज गद्दी पर बैठा। वह एक अयोग्य शासक था उसके अल्पकालीन शासन पर उसकी माँ शाह तुरकान छाई रही।
    • शाह तुरकान के अधिक प्रभाव से परेशान होकर तुर्की अमीरों ने रुकनुद्दीन फिरोज को हटाकर रजिया बेगम को सिंहासन पर बैठा दिया। इस तरह रजिया बेगम दिल्ली की पहली मुस्लिम महिला शासक बनी।
    • रजिया ने पर्दाप्रथा को त्यागकर खुले मुँह राजदरबार में आया करती थी।
    • गैर तुर्क को सामंत बनाने के प्रयासों से तुर्क अमीर उसके विरुद्ध हो गए और उसे गद्दी से हटा दिया।

    • रजिया को गद्दी से हटाकर तुर्क अमीरों ने मुईजुद्दीन बहरामशाह को गद्दी पर बैठाया।
    • रजिया की हत्या 13 अक्टूबर, 1240 ई0 को डाकुओं के द्वारा कैथल के पास कर दी गई।
    • मुईजुद्दीन बहरामशाह की भी हत्या मई 1242 ई0 में कर दी गई।
    • मुईजुद्दीन बहरामशाह के बाद दिल्ली की गद्दी पर अलाउद्दीन मसूद शाह बैठा।
    • बलबन ने षड्यंत्र के द्वारा 1246 ई0 में अलाउद्दीन मसूद शाह को सुल्तान के पद से हटाकर नासिरुद्दीन महमूद को सुल्तान बनावा दिया।
    • नासिरुद्दीन महमूद ऐसा सुल्तान था जो टोपी सीकर अपना जीवन-यापन करता था।
    • बलबन ने अपनी पुत्री का विवाह नासिरुद्दीन महमूद के साथ किया था।
    • बलबन का वास्तविक नाम बहाउद्दीन था। वह इल्तुतमिश का गुलाम था।
    • तुर्कान-ए-चिहलगानी ( इल्तुतमिश के द्वारा बनाया गया चालीस गुलाम सरदारों का संगठन) का विनाश बलबन ने किया था।

    • बलबन 1266 ई0 में गियासुद्दीन बलबन के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा। यह मंगोलों के आक्रमण से दिल्ली की रक्षा करने में सफल रहा।
    • बलबन ने राजदरबार में सिजदा  और पैबोस प्रथा की शुरुआत की थी।
    • बलबन ने फारसी रीति-रिवाज पर आधारित नवरोज उत्सव को शुरु करवाया।
    • अपने विरोधियों के प्रति बलबन कठोर 'लौह एवं रक्त' की नीति का पालन करता था।
    • नासिरुद्दीन महमूद ने बलबन को उलूँग खाँ की उपाधि प्रदान की।
    • गुलाम वंश का अंतिम शासक शम्मुद्दीन कैमुर्स था।

    नोट:  बलबन के राजदरबार में फारसी के प्रसिद्ध कवि           अमिर खुसरो और अमिर हसन रहते थे।



    ➢   चुकिं गुलाम वंश दिल्ली सल्तनत का ही भाग           है इसलिए दिल्ली सल्तनत के बारें में कुुुुछ               महत्वपूर्ण बातें जान ले।

          दिल्ली सल्तनत (1206 -1526 ई0) 


          राजधानी:       लाहौर (1206 -1210 ई0)
                                बदांयू  (1210 -1214 ई0)
                                दिल्ली (1214 -1327 ई0)
                                दौलताबाद (1327 -1334 ई0)
                                दिल्ली   (1334 -1506 ई0)
                               आगरा  (1506 -1526 ई0)

          भाषा:               फारसी
                                  हिंदवी 
          धर्म:                  सुन्नी इस्लाम 
          शासन:              सल्तनत 

          प्रथम सुल्तान:    कुतुबुद्दीन ऐबक
          अंतिम सुल्तान:   इब्राहिम लोदी

          स्थापना:        जून, 1206 ई0
         अंत:              पानीपत का प्रथम युद्ध  (अप्रैल,                             1526 ई0)

       ➢  दिल्ली सल्तनत के बारे महत्वपूर्ण बिंदु


      • 1206 ई0 से 1526 ई0 तक भारत में दिल्ली सल्तनत के पाँच राजवंशों ने शासन किया। इन पाँच राजवंशों के शासनकाल को सल्तनतकाल कहा जाता हैं। यह पाँच राजवंशों निम्न हैं।
      1. गुलाम वंश  (1206 -1290 ई0) 
      2. खिलजी वंश  (1290 -1320 ई0)
      3. तुगलक वंश  (1320 -1398 ई0)
      4. सैयद वंश  (1414 -1451 ई0)
      5. लोदी वंश  (1451 -1526 ई0)

      • तुर्क आक्रमणकारियों द्वारा शासन किए हुए राज्य को ही दिल्ली सल्तनत कहा जाता हैं। 
      • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में सुल्तान राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था।
      • सुल्तान स्वयं को अल्लाह का प्रतिनिधि मानता था। कुरान के नियमों के अनुसार शासन चलाता था।
      • सुल्तान को शासन-कार्य में सहायता देने के लिए मंत्रिपरिषद होती थी।
      • सल्तनतकाल (1206 ई0-1526 ई0) में चार प्रकार के कर किए जाते थे, खम्स, खराज, जकात और जजिया (सिर्फ हिन्दुओं से)
      • साम्राज्य प्रांतो में बंटे होते थे। प्रत्येक प्रांतो का शासक सूबेदार होता था।
      • प्रधानमंत्री को वजीर कहा जाता था।